October 30, 2026

मंत्री रेखा आर्या और पति पर 210 करोड़ की बेनामी संपत्ति के आरोप, ED-CBI जांच की मांग

Rekha

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। मंत्री और उनके पति के खिलाफ 210 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति अर्जित करने और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाते हुए एक सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), सतर्कता विभाग और लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं सचेत नागरिक मंसा राम उनियाल की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में देहरादून के कैंट थाने में 15 अक्टूबर 2026 को दर्ज एफआईआर संख्या 0158/2026 का हवाला दिया गया है। शिकायत के मुताबिक, इस मामले में मंत्री रेखा आर्या की ओर से अपने पति के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। वहीं, शिकायतकर्ता ने गिरधारी लाल साहू के कथित सार्वजनिक वीडियो बयानों का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि इनमें करीब 210 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति होने की बात स्वीकार की गई है।

शिकायत में इन कथित बयानों को कानूनी रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए ‘एडमिशन अगेंस्ट इंटरेस्ट’ का आधार बनाया गया है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर पाल सिंह भुल्लर से जुड़े फैसलों का हवाला देते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों से मामले की जांच शुरू करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कथित संपत्तियों के स्रोत, वित्तीय लेनदेन और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जानी चाहिए।

इस मामले में गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और एसआईटी की कार्रवाई भी चर्चा में है। शिकायत में दावा किया गया है कि आरोपी के खिलाफ 38 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और उसकी तलाश में बरेली, हल्द्वानी समेत छह से अधिक ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। वहीं, नैनीताल हाईकोर्ट में एफआईआर निरस्त कराने के लिए दायर याचिका संख्या WPCRL/2167/2026 का भी उल्लेख किया गया है।

तीन स्तरों पर जांच और संपत्तियां अटैच करने की मांग

शिकायतकर्ता ने ईडी और सीबीआई से कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्तियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा संबंधित संपत्तियों, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए आवश्यक संरक्षणात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।

वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोपों की विजिलेंस और लोकायुक्त से स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई गई है।

केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य की जांच संस्थाओं को भेजी गई इस शिकायत के बाद मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच एजेंसियों की ओर से कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित एजेंसियां शिकायत पर क्या कदम उठाती हैं और कथित संपत्तियों को लेकर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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