प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बोले “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” को “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलना होगा।
Delhi 13 September 2026,
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान “समावेशी वैश्विक शासन य। तऔर बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने” पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की। अपने वक्तव्य में, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि, ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने के मामले में सबसे अग्रिम पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे। हमें “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” को “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलना होगा।
वैश्विक शासन में आज की वास्तविकताओं को दर्शाना चाहिए, जिसमें विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है।
ग्लोबल साउथ को केवल नियम मानने वाले के बजाय नियम बनाने वाले की भूमिका में लाने के प्रयास किए जाने चाहिए। ब्रिक्स के माध्यम से, हम ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को वार्ता कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता प्रदान कर सकते हैं।
समुद्री नाविक, वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, फिर भी संकट के समय उन्हें अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने समुद्री नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता और समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना” को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा आज यह सभागार अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है। यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और अभूतपूर्व विश्वास का प्रमाण है। भारत की अध्यक्षता में हमने सभी प्रयास लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता, इन चार स्तंभों पर केंद्रित किये हैं। मुझे खुशी है कि आप सबके सहयोग और समर्थन से हम अपने साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में सक्षम हुए हैं।
पीएम मोदी ने कहा, आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और सामान्य मानव के जीवन पर इसका बहुत नकारात्मक और व्यापक प्रभाव हो रहा है।
महामारियों, क्लाइमेट डिजास्टर और सप्लाई चैन डिस्क्रिप्शन ने दिखाया है कि आज के इंटरकनेक्टेड वर्ल्ड में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में लचीलापन बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है।
पीएम मोदी ने कहा, भारतीय सभ्यता में प्रकृति को माँ का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, पूरक हैं। ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है।यही सस्टेनेबिलिटी का आधार है। यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस दिशा में हमने कई पहलुओं पर प्रगति की है। ब्रिक्स की शक्ति हमारी विविधता और को-ऑपरेशं में है। हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने, और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आये।
