प्रीतम सिंह का सरकार पर दोहरा हमला, नंदा की चौकी पुल और नकल विरोधी कानून पर उठाए सवाल
देहरादून में नंदा की चौकी स्थित पुल की एप्रोच रोड धंसने और केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तावित सख्त नकल विरोधी कानून को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से लेकर परीक्षा प्रणाली तक कई मुद्दों पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
प्रीतम सिंह ने कहा कि एक ओर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी देशभर में बड़ी संख्या में हाईवे निर्माण की बात करते हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर निर्माण के कुछ समय बाद ही गड्ढे पड़ गए थे। हालांकि बाद में उनकी मरम्मत कर दी गई, लेकिन निर्माण में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि अब नंदा की चौकी स्थित पुल की एप्रोच रोड धंसने का मामला सामने आया है। उनका दावा है कि करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बना यह निर्माण 16 दिन भी नहीं टिक पाया। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं। प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त है और इसी का परिणाम ऐसे मामलों के रूप में सामने आ रहा है।
प्रीतम सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
वहीं संसद में प्रस्तावित नए सख्त नकल विरोधी कानून को लेकर भी प्रीतम सिंह ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष 2024 में भी नकल विरोधी कानून लाने का दावा कर चुकी थी और कहा गया था कि इसके बाद पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। लेकिन कानून बनने के बावजूद देशभर में पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित नए कानून में ऐसा क्या अलग है, जिससे पेपर लीक का संगठित और सुनियोजित नेटवर्क समाप्त हो जाएगा। केवल सजा की अवधि बढ़ा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। असली चुनौती यह है कि सरकार पेपर लीक को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था कैसे लागू करेगी।
प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्यों में भी सख्त नकल विरोधी कानून बनाए गए, लेकिन उसके बाद भी पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा कि इसकी जवाबदेही सत्ता में बैठी सरकारों की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक के विरोध में जब लाखों छात्र-छात्राएं और बेरोजगार युवा सड़कों पर उतरे तो उनके साथ लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश का युवा अब केवल सख्त कानूनों के वादे नहीं, बल्कि पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, जवाबदेही और ईमानदार शासन चाहता है। उनके अनुसार, छात्र और बेरोजगार युवा अब परिणाम चाहते हैं और सरकार से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
प्रीतम सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
