August 1, 2026

चाणक्य डिफेंस कॉलेज में बाल अधिकार आयोग का औचक निरीक्षण, कई गंभीर अनियमितताएं उजागर

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उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने कालागांव स्थित चाणक्य डिफेंस कॉलेज का औचक निरीक्षण कर संस्थान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। आयोग के सदस्यों, बाल मनोवैज्ञानिकों और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम ने हॉस्टल, कक्षाओं, मेस, लाइब्रेरी और इन्फर्मरी का निरीक्षण किया, जहां छात्रों की सुरक्षा, निजता और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। आयोग ने संस्थान को सभी कमियों को दूर कर 10 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर आपत्ति लड़कों के हॉस्टल की डोरमेट्री में दो-दो सीसीटीवी कैमरे लगे होने पर जताई गई। आयोग ने इसे छात्रों की निजता का उल्लंघन बताते हुए तत्काल संज्ञान लिया। इसके अलावा हॉस्टल में शौचालयों की कमी, बालिकाओं के हॉस्टल के कमरों में दरवाजे नहीं होना, सीलन, घुटन और साफ-सफाई की खराब व्यवस्था भी निरीक्षण में सामने आई।

स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। इन्फर्मरी में डॉक्टर की जगह केवल एक फार्मासिस्ट मौजूद मिला। वहीं शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कक्षा 11 के कई छात्रों को अपने नामांकन की जानकारी तक नहीं थी। इससे ‘डमी एडमिशन’ और छात्रों पर अत्यधिक शैक्षणिक दबाव जैसी गंभीर आशंकाएं सामने आईं।

निरीक्षण के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि प्रदेश में डिफेंस कोचिंग के नाम पर कई ऐसे संस्थान संचालित हो रहे हैं, जिनकी कोई नियामक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि ये संस्थान केवल जीएसटी नंबर के आधार पर कंपनियों की तरह संचालित हो रहे हैं और बच्चों के भविष्य तथा अधिकारों से जुड़े आवश्यक मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आकर्षक वेबसाइटों और बड़े-बड़े विज्ञापनों से प्रभावित होकर अभिभावक बिना पर्याप्त जानकारी के बच्चों को ऐसे संस्थानों में भेज देते हैं, जबकि वहां का माहौल कई बार बच्चों के व्यक्तित्व विकास के अनुकूल नहीं होता। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को प्राथमिकता न दें, बल्कि बच्चों के सुरक्षित आवास, मानसिक स्वास्थ्य और बाल-मैत्रीपूर्ण वातावरण को भी उतना ही महत्व दें।

आयोग ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण में पाई गई सभी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए और 10 दिनों के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए। आयोग ने संकेत दिए हैं कि यदि निर्धारित समय सीमा में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

डॉ. गीता खन्ना अध्यक्ष बाल आयोग उत्तराखंड

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