गंगा सप्तमी पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती का संदेश: “नदियाँ नहीं तो दुनिया नहीं”
गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम से स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने “नदियाँ नहीं तो दुनिया नहीं” का प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, सभ्यता और आध्यात्मिक चेतना की आधारशीला हैं। यदि नदियाँ सुरक्षित रहेंगी तो धरती पर जीवन और भविष्य दोनों सुरक्षित रहेंगे।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में आध्यात्मिक संगम देखने को मिला, जहाँ कई संतों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही। प्रयागराज यात्रा के दौरान स्वामी जी की उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से दिव्य भेंट हुई, वहीं बागेश्वरपीठाधीश्वर आचार्य श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने भी उनसे मुलाकात की।
गंगा सप्तमी के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माँ गंगा को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते हुए कहा कि उनकी अविरलता और निर्मलता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि आस्था, जीवन और मोक्ष का मार्ग है।
परमार्थ निकेतन में आयोजित श्री हनुमंत कथा के दौरान भी स्वामी जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जहाँ उन्होंने हनुमान जी को शक्ति, सेवा और भक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कथाएँ समाज को संस्कारित करती हैं और जीवन को दिशा देती हैं।
स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि नदियों, घाटों और जलस्रोतों की स्वच्छता के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। यदि सभी मिलकर संकल्प लें, तो आने वाली पीढ़ियों को निर्मल और जीवनदायिनी नदियाँ सौंपी जा सकती हैं।
