September 22, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर को जमानत पर रिहा नहीं करने के दिए आदेश:20 नवंबर के अपने ही फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक,

Delhi 29 December 2025,

कुलदीप सेंगर से जुड़े उन्‍नाव रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट से पीड़िता को राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर को जमानत पर रिहा नहीं करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सेंगर को नोटिस जारी किया है। सेंगर से चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है। जिसमें 2017 के उन्नाव रेप मामले में कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को निलंबित कर दिया गया था।

सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने कहा, “हम बच्ची के प्रति जवाबदेह हैं। मेहता ने यह भी बताया कि सेंगर न केवल रेप का दोषी है, बल्कि पीड़िता के पिता की हत्या और अन्य लोगों पर हमले का भी दोषी ठहराया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि फिलहाल हम हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा रहे हैं।

वहीं कुलदीप सेंगर की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह मीडिया ट्रायल है। मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा, हम अस्थायी रूप से आदेश पर स्टे लगाने के पक्ष में हैं। यहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनने का सवाल नहीं है क्योंकि आरोपी दूसरे मामले में पहले से ही जेल में है।

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इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अरावली मामले पर 20 नवंबर के अपने ही फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली तारीख 21 जनवरी 2026 नियत की है।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया था। उसने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले अरावली क्षेत्रों में विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक नए खनन पट्टों के आवंटन पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। समिति के अनुसार, अरावली पहाड़ी को उन चिह्नित अरावली जिलों में मौजूद किसी भी भू-आकृति के रूप में परिभाषित किया जाएगा। जिसकी ऊंचाई स्थानीय निचले बिंदु से 100 मीटर या उससे अधिक हो। वहीं, अरावली पर्वतमाला एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह होगा।         सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम यह ज़रूरी समझते हैं कि कमेटी की सिफारिशों और इस कोर्ट के निर्देशों को अभी रोक दिया जाए। कमेटी बनने तक रोक जारी रहेगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट ने रिपोर्ट का पूरी तरह से आकलन करने और इन सवालों की जांच करने के लिए एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है।

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