दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधान संगठन का सचिवालय कूच, बैरिकेडिंग पर रोके गए ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधानों की विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश प्रधान संगठन के आह्वान पर गुरुवार को जिला प्रधान संगठन के पदाधिकारियों और ग्राम प्रधानों ने परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच किया। प्रदेशभर से पहुंचे ग्राम प्रधानों ने अपनी दस सूत्रीय मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और मांगों के जल्द समाधान की मांग उठाई।
जिला प्रधान संगठन और ब्लॉक अध्यक्षों ने बताया कि ग्राम प्रधान लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों और ग्राम प्रधानों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए संगठन ने शासन के समक्ष दस सूत्रीय मांगें रखी हैं। इन्हीं मांगों को लेकर प्रदेशभर के ग्राम प्रधान देहरादून पहुंचे और सचिवालय घेराव के लिए कूच किया।
सचिवालय से पहले पुलिस ने रोकी राह
ग्राम प्रधानों के सचिवालय कूच को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। सचिवालय से पहले ही भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग की गई है। प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग पर रोकने के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया गया।
प्रधान संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगें ग्राम पंचायतों के अधिकारों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से सीधे जुड़ी हैं। संगठन ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेने की अपील की है।
प्रधान संगठन की प्रमुख मांगें
- ग्राम प्रधानों का मानदेय और अधिकार बढ़ाया जाए।
- विधायकों और सांसदों की तर्ज पर ग्राम प्रधानों के लिए भी क्षेत्र विकास निधि तय की जाए।
- पंचायतराज एक्ट के तहत सभी 29 विभागों के कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपे जाएं।
- राज्य और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाले बजट में बढ़ोतरी की जाए।
प्रधान संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच वार्ता को लेकर नजरें टिकी हुई हैं। सरकार और प्रशासन के प्रतिनिधियों के साथ प्रधान संगठन की बातचीत में क्या निष्कर्ष निकलता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
हरीश मनराल, ग्राम प्रधान, पत्थरखोला सयालदेह, अल्मोड़ा
अमित रावत, ग्राम प्रधान, मुंडा सल्ट, अल्मोड़ा
रजनी चौहान, ग्राम प्रधान, नेरी, उत्तरकाशी
