विरासत महोत्सव-2026 में शास्त्रीय संगीत और लोक संस्कृति का अनूठा संगम, अनोल चटर्जी की प्रस्तुति ने बांधा समां
हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में आयोजित विरासत महोत्सव-2026 के सेकेंड लास्ट डे पर भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संस्कृति और समकालीन संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। गुरुवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक अनोल चटर्जी की प्रस्तुति, राजस्थानी कालबेलिया लोक नृत्य और जॉर्ज ब्रूक्स एवं कला रामनाथ की संगीतमय जुगलबंदी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत राजस्थान के प्रसिद्ध लोक नृत्य कालबेलिया से हुई। बाड़मेर के लांगा ग्रुप के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति के माध्यम से राजस्थानी लोक संस्कृति और परंपरा की जीवंत झलक पेश की। कलाकार गीता, मनीषा और निशा ने आकर्षक नृत्य शैली और भावपूर्ण अभिव्यक्तियों से दर्शकों का मन मोह लिया। इस दौरान जाकिर खान ने हारमोनियम, दूड़े खान ने सारंगी, शौकत खान ने ढोलक, इरफान हुसैन ने खड़ताल, रामनाथ ने डफली और सागर ने मंजीरे पर संगत की। वहीं सलीम खान, फारूक, सोनू खान और जाकिर की गायकी ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।
इसके बाद प्रतिष्ठित हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक एवं संगीतकार अनोल चटर्जी ने अपनी सुरीली प्रस्तुति से महफिल में शास्त्रीय संगीत के रंग बिखेरे। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन से की। इसके बाद ठुमरी, दादरा और भजन की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उनके साथ तबले पर शुभ महाराज, हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा और तानपुरे पर सिद्धांत प्रुथी ने संगत की। कलाकारों के बीच सुर और ताल का सुंदर सामंजस्य देखने को मिला।
अनोल चटर्जी पद्मभूषण पंडित अजय चक्रवर्ती के प्रमुख शिष्यों में शामिल हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संगीत समारोहों के साथ ही अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश सहित कई देशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां दी हैं। वे वर्तमान में कोलकाता स्थित श्रुतिनांदन स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें आदित्य बिड़ला कला किरण पुरस्कार, श्रुतिनंदन पुरस्कार और युवा कलाकारों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।
सांस्कृतिक संध्या का एक अन्य प्रमुख आकर्षण ‘एन इवनिंग ऑफ कॉन्फ्लुएंस’ रहा। इसके तहत विश्वविख्यात सैक्सोफोन वादक एवं संगीतकार जॉर्ज ब्रूक्स और भारतीय शास्त्रीय वायलिन वादक कला रामनाथ ने अपनी संयुक्त प्रस्तुति से भारतीय शास्त्रीय और समकालीन संगीत का खूबसूरत संगम पेश किया। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने दर्शकों को संगीत की अलग-अलग विधाओं और सुरों की विविधता से रूबरू कराया।
प्रस्तुति की शुरुआत जॉर्ज ब्रूक्स की रचना पर आधारित काफ़ी ठाट से हुई, जबकि समापन राग भैरवी के साथ किया गया। तबले पर शुभ महाराज ने संगत कर प्रस्तुति की खूबसूरती को और बढ़ाया।
जॉर्ज ब्रूक्स जैज़ और भारतीय शास्त्रीय संगीत के संगम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखते हैं। उन्होंने उस्ताद जाकिर हुसैन, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और कई अन्य प्रतिष्ठित संगीतकारों के साथ काम किया है। वर्ष 1980 में भारत आने के बाद उन्होंने किराना घराने के गायक पंडित प्राणनाथ से गुरु-शिष्य परंपरा के तहत भारतीय शास्त्रीय संगीत का अध्ययन किया। करीब 25 वर्षों तक उन्होंने हिंदुस्तानी, कर्नाटक और लोक संगीत परंपराओं के कलाकारों के साथ देश-विदेश में प्रस्तुतियां दी हैं।
वहीं, कला रामनाथ भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित वायलिन वादक हैं और मेवाती घराने की संगीत परंपरा से जुड़ी हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान और पंडित जसराज गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने देश के प्रमुख संगीत समारोहों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
विरासत महोत्सव के सेकेंड लास्ट डे पर कलाकारों की इन विविध प्रस्तुतियों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि और संगीत की वैश्विक पहुंच को रेखांकित किया। लोक नृत्य से लेकर शास्त्रीय गायन और भारतीय-समकालीन संगीत के संगम तक, हर प्रस्तुति ने दर्शकों को एक अलग सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया।
