स्वैच्छा से सेक्स वर्क करने वाला अपराधी नहीं माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट,
Delhi 02 Jun 2026,
भारत में सामाजिक बुराईयों के रूप में देखे जाने वाले ‘वेश्यावृत्ति’ पर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट का यह आदेश सीधे तौर पर व्यक्तिगत आजादी और मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने करीब 70 साल पुराने ‘इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट’ आईटीपीए का बारीकी से अध्ययन करने के बाद साफ कर दिया है कि अगर कोई व्यस्क स्वैच्छा से सेक्स वर्क का रास्ता चुनता है तो उसे अपराधी नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि, ऐसे लोगों को सिर्फ उनके पेशे की वजह से न तो पुलिस परेशान करे और न ही उन पर कोई बेवजह कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि कानून की आईटीपीए के तहत प्रख्यापित धाराओं के उल्लंघन पर पहले की तरह ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21- राइट टू लाइफ एंड पर्सनल लिबर्टी का हवाला देते हुए कहा कि देश के हर नागरिक की तरह सेक्स वर्कर्स को भी समाज में सम्मान से जीने और पूर्ण कानूनी सुरक्षा पाने का पूरा अधिकार है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और देश की सभी प्रशासनिक एजेंसियों को निर्देश जारी किए कि, ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं तथा अपनी मर्जी से यह काम करने वाले वयस्कों के अधिकारों का हनन न करें।
कोर्ट ने अपने इस फैसले में आईटीपीए कानून की मूल भावना के दृष्टिगत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
शोषण के खिलाफ सुरक्षा: इस कानून का असली मकसद अपनी मर्जी से इस पेशे में शामिल वयस्कों को दंडित करना या प्रताड़ित करना नहीं है। मानव तस्करी पर वार: कानून का मुख्य उद्देश्य मानव तस्करी ,जबरदस्ती, जालसाजी या किसी मजबूरी का फायदा उठाकर लोगों का किए जाने वाले व्यावसायिक शोषण को रोकना है। अगर किसी को धोखे से इस दलदल में धकेला जाता है तो वह कानूनन बेहद गंभीर अपराध बना रहेगा और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी। वेश्यालय चलाना जुर्म:अपनी मर्जी से काम करने की छूट का मतलब यह कतई नहीं है कि कोठा या वेश्यालय चलाने की अनुमति मिल गई है। व्यावसायिक सेक्स एक्टिविटी के लिए अपनी संपत्ति या जगह का इस्तेमाल करने देना अभी भी एक दंडनीय अपराध है। वेश्यालय चलाने या उसके लिए किराए पर जगह देने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। किसी अन्य सेक्स वर्कर की कमाई के सहारे अपनी जिंदगी बसर करना या उसका फायदा उठाना अपराध है। किसी को इस धंधे में आने के लिए मजबूर करना, बहलाना-फुसलाना या उसकी तस्करी करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, अस्पतालों या धार्मिक स्थलों के आसपास इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
