काशीपुर में AI से चल रहा था साइबर ठगी का कॉल सेंटर, एक महीने में 48 हजार से ज्यादा फर्जी कॉल
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने काशीपुर में संचालित एक बड़े हाईटेक डिजिटल कॉल सेंटर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस नेटवर्क के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एजेंटिक AI तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाया जा रहा था। आरोपी क्लाउड आधारित डिजिटल एक्सचेंज के माध्यम से ऑटोमेटेड कॉल और एसएमएस भेजकर लोगों को निशाना बना रहे थे। जांच में खुलासा हुआ है कि महज एक महीने के भीतर 48 हजार से अधिक फर्जी कॉल की गईं। एसटीएफ ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरा फरार है।
एसटीएफ के आईजी डॉ. नीलेश भरणे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि काशीपुर में चलाया जा रहा यह नेटवर्क सिम बॉक्स की तर्ज पर काम कर रहा था। आरोपी आसिफ और आमिर क्लाउड बेस्ड डिजिटल एक्सचेंज के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों को कॉल और मैसेज भेजते थे। इन कॉल्स में AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था, जिसके माध्यम से सामने वाले व्यक्ति से आर्टिफिशियल आवाज में बातचीत कर उसे अपने जाल में फंसाया जाता था।
उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क के जरिए डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा था। ऑटोमेटेड कॉलिंग सिस्टम के कारण कम समय में हजारों लोगों तक पहुंच बनाई जा रही थी। एक महीने में 48 हजार से अधिक फर्जी कॉल किए जाने का मामला सामने आया है।
एक महीने से अधिक चला ऑपरेशन, उपकरण और दस्तावेज बरामद
आईजी एसटीएफ के मुताबिक, मिशन हॉटस्पॉट और दूरसंचार विभाग (DoT) के सहयोग से चलाए जा रहे अभियान के तहत एक महीने से अधिक समय तक इस नेटवर्क की निगरानी और जांच की गई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कथित कॉल सेंटर से जुड़े उपकरण, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरे आरोपी की तलाश की जा रही है।
डॉ. नीलेश भरणे ने बताया कि उत्तराखंड में AI और क्लाउड आधारित डिजिटल एक्सचेंज के जरिए संचालित इस तरह के हाईटेक साइबर फ्रॉड नेटवर्क का यह पहला और अब तक का सबसे बड़ा मामला सामने आया है।
एसटीएफ अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, तकनीकी संसाधनों और ठगी के संभावित शिकार लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के तार प्रदेश के बाहर किन अन्य साइबर अपराधियों से जुड़े हैं।
डॉ. नीलेश भरणे, IG STF
