June 24, 2026

डॉ. पुष्पा खण्डूरी की कविता, “धन के रिश्ते”

देहरादून 14 नवंबर 2022,

धन के रिश्ते

रिश्ते नाते दूर -दूर हुए सब।

धन के रिश्ते आम हो गए॥

पूजा पाठ नित नेम आचरण।

दे कर दक्षिणा मोटी – मोटी,

सब पंडित के नाम हो गए॥

रिश्ते नाते दूर -दूर हुए सब।

धन के रिश्ते आम हो गए॥

तीरथ पूजा सुबह-सुबह कर।

शाम हम सफर जाम हो गए॥

देवालय को निकले ये घर से ।

पहुँचे तो पिकनिक धाम हो॥

आज तभी बनी आपदा।

विपदा बनकर टूट रही है॥

तीर्थों पर हर रोज हादसे।

हर दिन जैसे आम हो गए॥

रिश्ते नाते दूर -दूर हुए सब।

धन के रिश्ते आम हो गए॥

माँ की ममता ममी हो गई।

पिता सदा को डैड हो गए॥

बच्चे अब क्यों पैदा करने।

पति पत्नी ही बेबी बेब हो गए॥

रिश्ते नाते दूर -दूर हुए सब।

धन के रिश्ते आम हो गए॥

 

कवयित्री का परिचय

डॉ. पुष्पा खण्डूरी

एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष                        हिन्दी, डी.ए.वी ( पीजी ) कालेज देहरादून, उत्तराखंड।

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