साइबर ठगी में इस्तेमाल म्यूल अकाउंट गिरोह पर STF की बड़ी कार्रवाई, मुकदमा दर्ज
उत्तराखंड एसटीएफ ने साइबर अपराधों में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट्स (फर्जी या किराये पर उपलब्ध कराए गए बैंक खातों) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में साइबर अपराधियों को बैंक खाते और अन्य बैंकिंग संसाधन उपलब्ध कराने वाले आरोपियों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री उत्तराखंड के निर्देशन और पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड के मार्गदर्शन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ द्वारा साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध बैंक खातों की जांच के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद साइबर टीम ने बैंकिंग रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और मनी ट्रेल का गहन विश्लेषण किया।
जांच के दौरान सीसीपीएस टीम को ऐसे खातों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली जिनका उपयोग साइबर अपराध से अर्जित धनराशि को छिपाने और विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा था। सत्यापन में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि देश के विभिन्न राज्यों में हुए डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त धनराशि इन खातों में जमा की जा रही थी। इसके बाद रकम को एटीएम निकासी, पीओएस ट्रांजेक्शन, यूपीआई और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता था, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचने वाली मनी ट्रेल को जटिल बनाया जा सके।
एसटीएफ की जांच में यह भी पाया गया कि खाताधारक अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा रहे थे। बदले में उन्हें कमीशन या आर्थिक लाभ प्राप्त होता था। इन संसाधनों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी साइबर अपराध से अर्जित धनराशि के संग्रहण, छिपाने, लेयरिंग और वितरण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इसके आधार पर थाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में एफआईआर संख्या 32/2026 दर्ज की गई है।
मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 112(2), 318(4), 61(2), 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और बैंक खातों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड अथवा इंटरनेट बैंकिंग सुविधा उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि लालच या कमीशन के बदले बैंक खाते उपलब्ध कराना भी अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।