April 3, 2026

होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मसौदा प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लगा वीटों,

Delhi, 03 April 2026,

होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मसौदा प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटों लगा दिया गया है। यह प्रस्ताव बहरीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मतदान के लिए लाया गया था।जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में प्रभावित देशों के वाणिज्यिक जहाजों को सामुहिक रूप से सुरक्षा प्रदान करना था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव पर चीन और रूस ने वीटो लगाकर इसे ब्लॉक कर दिया है। यह प्रस्ताव ईरानी नाकाबंदी के बीच “सभी आवश्यक उपायों” (सैन्य शक्ति सहित) के जरिए जहाजों की रक्षा का प्रयास कर रहा था।

बहरीन के मसौदा प्रस्ताव का विरोध करते हुए, वीटो शक्ति संपन्न चीन ने स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी ऐसे प्रस्ताव का विरोध करेगा जिसमें बल प्रयोग की अनुमति दी जाए। वहीं रूस ने भी ईरान का साथ देते हुए इस प्रस्ताव का विरोध किया। फ्रांस ने भी होर्मुज में सेना तैनात करने पर वीटो लगाया, जबकि वो खुद नाटो में शामिल देश है।

बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक महीने से ज्यादा समय तक चल चुका है। इस वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। पेट्रोलियम पदार्थों की कमी के चलते वैश्विक संकट पैदा हो गया है। जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

इसी को लेकर बहरीन ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसका विरोध चीन-रूस के साथ फ्रांस भी कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से ये भी कहा गया है कि होर्मुज में अगर दिक्कतें हैं, तो इसकी वजह इजरायल-अमेरिका की अवैध एयरस्ट्राइक है।

बता दें कि, बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक मसौदा प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है, जिसमें वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए जरूरी सभी रक्षात्मक उपायों की अनुमति देने की बात कही गई है। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जयानी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि परिषद इस प्रस्ताव पर एकजुट रुख अपनाएगी। बहरीन को इस प्रस्ताव में अन्य खाड़ी देशों और अमेरिका का समर्थन मिला है। पहले इस मसौदे में सख्त कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख था, लेकिन रूस और चीन की आपत्तियों को देखते हुए इसे हटा दिया गया‌ रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव कम से कम 6 महीने तक लागू रहेगा या जब तक सुरक्षा परिषद कोई दूसरा फैसला न ले।

चीन के साथ, रूस और फ्रांस ने किया विरोध,

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्रोतों से बताया गया कि मसौदा प्रस्ताव के चौथे मसौदे पर साइलेंस प्रोसीजर के दौरान चीन, रूस और फ्रांस ने आपत्ति जताई। इसके बाद अंतिम मसौदा तैयार कर लिया गया है। सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित होने के लिए कम से कम 9 वोट और स्थायी सदस्यों-अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस में से किसी का वीटो नहीं होना जरूरी है।

वहीं बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय नौवहन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, जो वैश्विक हितों के खिलाफ है और इसका कड़ा जवाब जरूरी है। अरब लीग ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। इसी बीच, ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों के साथ बैठक कर इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने और सुरक्षित बनाने पर चर्चा की‌ है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए नाटो सहित अन्य देशों से ईरान पर संयुक्त रूप से सैन्य कार्रवाई करने के लिए कहा है। डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रस्ताव पर नाटो के कई सदस्य ही सहमत नहीं हुए हैं। जिससे इस मामले में अनिश्चित की स्थिति बनी हुई है।

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