May 23, 2026

आरक्षण लाभों के माध्यम से शैक्षिक और आर्थिक सशक्तिकरण के एक निश्चित स्तर तक पहुंच जाने पर अगली पीढ़ी के लिए पात्रता का पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट,

Delhi 22 May 2026,

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर को आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि उन बच्चों को आरक्षण क्यों चाहिए? जिनके माता पिता आईएएस ऑफिसर्स हैं। कोर्ट ने उन समृद्ध परिवारों द्वारा कोटा लाभों की निरंतर मांग पर सवाल उठाया? जो पहले ही शैक्षिक और आर्थिक उन्नति प्राप्त कर चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर के लिए आरक्षण लाभों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उन बच्चों के लिए आरक्षण की आवश्यकता पर सवाल उठाया? जिनके माता-पिता दोनों ही आईएएस अधिकारी हैं। कोर्ट ने कहा, ‘अगर दोनों माता-पिता आईएएस आफिसर हैं, तो आरक्षण की मांग क्यों करें?’ अदालत ने टिप्पणी करते हुए जोर दिया कि शैक्षिक और आर्थिक प्रगति से सामाजिक गतिशीलता आती है। शैक्षिक और आर्थिक सशक्तिकरण के साथ ही सामाजिक गतिशीलता भी आती है। इसलिए बच्चों के लिए आरक्षण की मांग करना उचित हैधंौौशनंँ। यह भी एक ऐसा मुद्दा है जिस पर हमें विचार करना होगा। अदालत ने आगे कहा कि कई सरकारी आदेशों में पहले से ही उन्नत वर्गों को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने का प्रावधान है, लेकिन अब इनको चुनौती दी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘सामाजिक गतिशीलता मौजूद है। अब सरकार के आदेशों के तहत इन सभी लोगों को आरक्षण से बाहर रखा गया है, और वे इस बहिष्कार पर सवाल उठा रहे हैं। इसे भी ध्यान में रखना होगा।’ सुनवाई के दौरान, अदालत ने उन परिवारों द्वारा आरक्षण लाभों की निरंतर मांग पर सवाल उठाया, जिन्होंने कोटा प्रणाली के माध्यम से पहले ही सामाजिक और आर्थिक उन्नति प्राप्त कर ली है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी की, ‘छात्रों के माता-पिता अच्छी नौकरियों में हैं, अच्छी आय कमा रहे हैं, और बच्चे फिर से आरक्षण चाहते हैं। इस दशा में, उन्हें आरक्षण से बाहर कर देना चाहिए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, एक बार जब परिवार आरक्षण लाभों के माध्यम से शैक्षिक और आर्थिक सशक्तिकरण के एक निश्चित स्तर तक पहुंच जाते हैं, तो अगली पीढ़ी के लिए पात्रता का पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए। कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों के लिए आरक्षण के बीच अंतर का भी उल्लेख किया।

 

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