भड़काऊ भाषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज,
Delhi 29 April 2026,
भड़काऊ बयानबाज़ी (हेट स्पीच) के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कई जगहों पर धर्म संसदों में दिए गए भड़काऊ भाषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सजा का निर्धारण पूरी तरह से विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हेट स्पीच से निपटने के लिए अभी मौजूदा कानून पर्याप्त हैं और किसी नए कानून की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर आधारित संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक न्यायपालिका कानून की व्याख्या तो कर सकती हैं लेकिन वे कानून नहीं बना सकतीं या कानून बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच के मामले में एफआईआर दर्ज करना पुलिस के लिए जरूरी है। अगर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती तो पीड़ित शख्स कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संसद के काम में दखल नहीं देगी। नया कानून बनाना सिर्फ संसद का काम है और अदालत सिर्फ इसकी व्याख्या कर सकती है। सरकार को नया कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। बीएन एस एस का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। मजिस्ट्रेट के पास व्यापक निगरानी अधिकार हैं और धारा 156(3) के तहत दिए गए आदेश संज्ञान से पहले के होते हैं।
