सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ, उत्तराखंड के रेशमी उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बुधवार को देहरादून के एक निजी होटल में सिल्क मार्क ऑर्गेनाइजेशन, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, रेशम निदेशालय उत्तराखंड एवं उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन द्वारा आयोजित सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ किया। इस दौरान कृषि मंत्री ने एक्सपो में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर रेशमी उत्पादों का अवलोकन किया और प्रतिभागियों से उनके उत्पादों एवं कारोबार की जानकारी ली।
सिल्क एक्सपो-2026 में कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के 25 से अधिक प्रतिभागी अपने आकर्षक और उच्च गुणवत्ता वाले रेशमी उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय कर रहे हैं। एक्सपो में विभिन्न प्रकार के रेशमी वस्त्र और उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध हैं। आयोजन से स्थानीय उत्पादकों, कारीगरों, बुनकरों और रेशम से जुड़े उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद मिल रही है।
314.6 मीट्रिक टन बाईवोल्टाइन सिल्क का उत्पादन
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड को देश में उच्च गुणवत्ता वाले बाईवोल्टाइन सिल्क के लिए विशेष पहचान प्राप्त है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य में 314.6 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाले बाईवोल्टाइन रेशम कोयों का उत्पादन हुआ है। वहीं, प्रदेश में रेशम कीटपालन से करीब 10,500 कृषक परिवार जुड़े हैं, जो रेशम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि किसान केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि मूल्य संवर्धन से होने वाली आय में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में दून सिल्क ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उत्तराखंड रेशम फेडरेशन द्वारा रेशमी वस्त्रों के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं तथा फेडरेशन के रेशमी वस्त्रों के उत्पादन एवं बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
महिला समूहों और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेशम से जुड़ी योजनाओं में स्वयं सहायता समूहों, महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की भागीदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने युवाओं को रेशम की पारंपरिक गतिविधियों के साथ आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इससे रेशम उत्पादन को रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाया जा सकेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर पैदा होंगे।
व्यापार और बाजार विस्तार का प्रभावी मंच है एक्सपो
गणेश जोशी ने कहा कि सिल्क एक्सपो केवल उत्पादों के प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि रेशमी उत्पादों के व्यापार, विपणन और बाजार विस्तार का प्रभावी माध्यम है। ऐसे आयोजनों से रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों, कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को नए बाजार एवं आय के अवसर मिलते हैं। साथ ही उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
उन्होंने सिल्क एक्सपो-2026 की सफलता की कामना करते हुए कहा कि उत्तराखंड के रेशमी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और रेशम से जुड़े किसानों एवं उद्यमियों की आय बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
