September 4, 2026

हैदराबाद प्रेस दौरा: ICMR-NIN में पोषण अनुसंधान से रूबरू हुआ उत्तराखंड का मीडिया प्रतिनिधिमंडल

Press Tour

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे के दूसरे दिन उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN), हैदराबाद का भ्रमण किया। इस दौरान पत्रकारों को पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा और राष्ट्रीय नीतियों एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में संस्थान की भूमिका की जानकारी दी गई।

आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए खाद्य संरचना, पोषक तत्वों की आवश्यकताओं और आहार संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करने में संस्थान के वैज्ञानिक योगदान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इंडियन फूड कंपोजिशन टेबल्स देश में उपलब्ध विभिन्न खाद्य पदार्थों में ऊर्जा, प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों और खनिजों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती हैं। यह जानकारी शोधकर्ताओं, खाद्य उद्योग और जन स्वास्थ्य नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री है।

बचपन से विकसित हों स्वस्थ खान-पान की आदतें

डॉ. कुलकर्णी ने भारतीयों के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकताओं और रिकमेंडेड डायटरी प्लान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अलग-अलग आयु वर्ग और शारीरिक अवस्थाओं के अनुसार पोषण संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करना स्वस्थ जीवनशैली के लिए जरूरी है।

उन्होंने स्वस्थ खान-पान की आदतों को बचपन की शुरुआती अवस्था से विकसित करने पर जोर दिया। विशेष रूप से दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आहार में अतिरिक्त चीनी से बचने संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी।

मोटापा और कुपोषण की दोहरी चुनौती

डॉ. कुलकर्णी ने कुपोषण के दोहरे बोझ पर चिंता जताते हुए बच्चों में बढ़ते अधिक वजन और मोटापे की समस्या का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय जीवनशैली तथा वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

उन्होंने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल भोजन की उपलब्धता बेहतर पोषण की गारंटी नहीं है। इसके लिए आहार में विविधता और खान-पान की आदतों में सकारात्मक बदलाव भी जरूरी हैं।

उत्तराखंड के मोटे अनाजों पर शोध

डॉ. कुलकर्णी ने बताया कि उत्तराखंड के स्थानीय कृषि उत्पादों और मोटे अनाजों मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा के विशिष्ट पोषक तत्वों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके अलावा रागी (फिंगर मिलेट) के सेवन से एनीमिया में कमी पर प्रभाव का आकलन करने के लिए नैदानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन भी जारी हैं।

पोषण संबंधी भ्रांतियां दूर करने में मीडिया की अहम भूमिका

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने पोषण सूचना, संचार एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी डॉ. सुब्बा राव द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में भी भाग लिया। उन्होंने अल्पपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और जीवनशैली से जुड़े चयापचय संबंधी विकारों के एक साथ मौजूद होने की चुनौती पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पोषण संबंधी जानकारी और आम लोगों की दैनिक खान-पान की आदतों के बीच की दूरी को पाटने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने पत्रकारों से खाद्य पदार्थों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और प्रमाण-आधारित आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार पत्रकारिता करने का आह्वान किया।

अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का किया भ्रमण

प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भी भ्रमण किया। इस दौरान पत्रकारों ने शोधकर्ताओं के साथ संवाद कर खाद्य विश्लेषण और लिपिड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

सालार जंग संग्रहालय भी पहुंचे पत्रकार

हैदराबाद प्रेस दौरे के सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने सालार जंग संग्रहालय का भी भ्रमण किया। पत्रकारों ने हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक और अभिलेखीय संग्रहों की जानकारी ली।

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