October 30, 2026

विरासत महोत्सव में सुरों की त्रिवेणी, सिद्धार्थ बेलमन्नू और राजहेश वैद्य की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

Virasat

गढ़ी कैंट के निंबूवाला स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित विरासत महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत के नाम रही। गुरुवार को एक ओर जहां प्रख्यात शास्त्रीय गायक सिद्धार्थ बेलमन्नू ने अपनी सुरमयी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, वहीं प्रसिद्ध वीणा वादक राजहेश वैद्य ने वीणा के मधुर स्वरों से महफिल में चार चांद लगा दिए। झमाझम बारिश के बीच भी संगीत प्रेमियों का उत्साह कम नहीं हुआ और शास्त्रीय संगीत की धुनों से पूरा परिसर गुलजार रहा।

सिद्धार्थ बेलमन्नू ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग की घोषणा के साथ की। इसके बाद उन्होंने शास्त्रीय गायन के माध्यम से सुरों की शुद्धता, राग की बारीकियों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति का शानदार प्रदर्शन किया। उनकी गायकी में सुरों का सहज प्रवाह और शास्त्रीय संगीत की गहराई देखने को मिली। इस दौरान तबले पर शुभ महाराज और हारमोनियम पर जाकिर ढोलपुरी ने संगत की। दोनों कलाकारों की सधी हुई संगत ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।

कर्नाटक के उडुपी जिले के कारकाला से ताल्लुक रखने वाले सिद्धार्थ बेलमन्नू भारतीय शास्त्रीय संगीत के उभरते हुए प्रतिभाशाली कलाकारों में शामिल हैं। उन्होंने कर्नाटक संगीत से अपनी प्रारंभिक शिक्षा शुरू की और बाद में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने पंडित विनायक तोरवी सहित प्रतिष्ठित संगीत गुरुओं के मार्गदर्शन में अपनी साधना को आगे बढ़ाया है। वे ऑल इंडिया रेडियो के ए-ग्रेड कलाकार हैं और देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं।

वहीं, सांस्कृतिक संध्या का एक अन्य प्रमुख आकर्षण विख्यात वीणा वादक राजहेश वैद्य की प्रस्तुति रही। उनके वीणा वादन से निकली मधुर तरंगों ने श्रोताओं को भारतीय वाद्य संगीत की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। वीणा के तारों से निकलते सुरों की गहराई, लयात्मकता और तेज गति ने श्रोताओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। उनके साथ मृदंगम पर मोहन रमन और तबले पर प्रवीण नारायण ने संगत की। तीनों कलाकारों के बीच सुर और ताल का सुंदर सामंजस्य देखने को मिला।

राजहेश वैद्य को वीणा वादन की कला अपने पिता एवं गुरु के.एम. वैद्यनाथन से विरासत में मिली। उन्होंने दिग्गज वीणा वादक चिट्टी बाबू के मार्गदर्शन में वादन की बारीकियां सीखीं। अपनी विशिष्ट शैली और आधुनिक प्रयोगों के लिए पहचाने जाने वाले राजहेश वैद्य ने देश-विदेश में अनेक प्रस्तुतियां दी हैं। उनके नाम 50 से अधिक एल्बम हैं और उन्हें कलाइमामणि सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

21 स्कूलों के बच्चों ने दिखाई संगीत प्रतिभा

विरासत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘विरासत साधना’ कार्यक्रम में भी युवा प्रतिभाओं का उत्साह देखने को मिला। प्रदेश के 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने गायन और वाद्य संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने बांसुरी, सितार, वायलिन, तबला, पखावज सहित विभिन्न वाद्ययंत्रों के माध्यम से भारतीय संगीत की विविधता को मंच पर जीवंत किया। गायन प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

कार्यक्रम में माउंट लिटेरा जी स्कूल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस, ज्ञानंदा स्कूल फॉर गर्ल्स, माउंट फोर्ट एकेडमी, द टोंसब्रिज स्कूल, वेलहम बॉयज स्कूल, होपटाउन गर्ल्स स्कूल, द एशियन स्कूल, सेंट कबीर अकादमी, पीवाईडीएस लर्निंग एकेडमी और द ओबेरॉय स्कूल ऑफ इंटीग्रेटेड स्टडीज समेत विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

विरासत साधना का उद्देश्य बच्चों को संगीत और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को संगीत की विभिन्न विधाओं को समझने और अपनी कला को निखारने का अवसर मिला। विरासत महोत्सव की यह संगीतमय संध्या जहां दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुतियों के कारण यादगार बनी, वहीं स्कूली बच्चों की भागीदारी ने भारतीय संगीत की भावी पीढ़ी की संभावनाओं को भी उजागर किया।

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