June 3, 2026

बीजेपी सरकार दिल्ली से तृणमूल कांग्रेस को ख़त्म करने की साज़िश कर रही है: ममता बनर्जी,

West Bengal, 03 Jun 2026,

तृणमूल कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने वाली ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर की सबसे कड़ी चुनौती से जूझ रही हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस टीएमसी में बगावत की शुरुआत हो गई है। ममता बनर्जी के 15 साल सत्ता में रहने के बाद ममता बनर्जी को हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। टीएमसी के विधायकों के एक बड़े गुट ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में इन विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर खुद को ‘असली टीएमसी’ होने का दावा किया है। स्पीकर से ऋतब्रत को विपक्ष का नेता नियुक्त करने की मांग की है। इस संकट से निपटने के लिए ममता बनर्जी ने पार्टी की सभी समितियां भंग कर दी हैं और नए सिरे से पुनर्गठन की बात कही है।

टीएमसी पार्टी में विभाजन होना तय माना जा रहा है।

चुनाव नतीजों के बाद पार्टी में बग़ावती सुर अचानक तेज़ होने लगे हैं। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस हार के लिए तृणमूल सरकार के कामकाज के तरीके़ और पार्टी की चुनावी रणनीति को ज़िम्मेदार ठहराया है। उसके बाद नेताओं के इस्तीफ़ों का सिलसिला लगातार तेज़ हो रहा है। वही टीएमसी के वफादार नेताओं का कहना है कि, चुनाव नतीजों के बाद का घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए परेशानी का सबब ज़रूर रहा है। लेकिन वह ज़मीनी नेता रही हैं और प्रतिकूल हालात में लड़ने का उनको लंबा अनुभव रहा है। वह इस बार भी हार नहीं मानेंगी। उन्होंने पार्टी को बचाने की रणनीति पर काम भी शुरू कर दिया है।

बीते सप्ताह विधानसभा में पार्टी विधायक दल का नेता चुनने के लिए टीएमसी विधायक दल की बैठक हुई थी। बागी विधायकों ने आरोप लगाया है कि, उसमें पारित प्रस्ताव पर कथित तौर पर उन विधायकों के भी हस्ताक्षर थे जो उस बैठक में हाज़िर ही नहीं थे। टीएमसी के ही दो विधायकों – ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से इसकी शिकायत की थी। उसके बाद शुभेंदु अधिकारी सरकार ने इस मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी थी। सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन दोनों विधायकों के नाम को सार्वजनिक किया था। उनके नाम सार्वजनिक होते ही ममता बनर्जी ने दोनों विधायकों को पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद ही टीएमसी के प्रवक्ता रहे रिजू दत्त ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि उन लोगों के पास 50 विधायकों का समर्थन है और वही असली टीएमसी है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दत्त को टीएमसी पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।

अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और टीएमसी नेताओं पर हमला होने और टीएमसी में बगावत की घटनाओं के लिए, ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है। चुनाव बाद की हिंसा के विरोध में ममता ने मंगलवार को धर्मतल्ला इलाके़ में धरना दिया। हालांकि पुलिस ने पहले धरना देने की अनुमति नहीं दी। लेकिन बाद में उनको तीन घंटे तक धरना देने की दूसरी जगह पर अनुमति दी गई। ममता बनर्जी ने कहा, “बीजेपी सरकार दिल्ली से तृणमूल कांग्रेस को ख़त्म करने की साज़िश कर रही है। लेकिन मैं उसे इसमें कामयाब नहीं होने दूंगी. पार्टी के विधायकों, पार्षदों और नेताओं को ग़ैरक़ानूनी तरीके़ से धमकियां दी जा रही हैं। इतने भारी राजनीतिक संकट के बाद भी ममता बनर्जी का आत्मविश्वास डगमगाया नहीं है। उनका कहना है कि अगर वह जीवित रहीं तो बीजेपी को सत्ता से हटा कर दम लेंगी। उन्होंने बीजेपी पर चुनावी धांधली का भी आरोप दोहराया।

विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव नतीजों के बाद राज्य का राजनीतिक परिदृश्य जिस तेज़ी से बदला है उससे तृणमूल कांग्रेस में टूट की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। उनका कहना था कि कुछ नेता हमेशा सत्ता के साथ रहते हैं। इसके अलावा ज़्यादातर नेताओं के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले लंबित हैं। उससे बचने के लिए वे पाला बदल सकते हैं।

 

बीजेपी सरकार दिल्ली से तृणमूल कांग्रेस को ख़त्म करने की साज़िश कर रही है: ममता बनर्जी,

BJP government conspiring to eliminate Trinamool Congress: Mamata Banerjee

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