तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को लगा झटका: गुजरात में भाजपा, बिहार में जन सुराज पार्टी, मध्य प्रदेश से कांग्रेस जीती,
Delhi 03 August 2026
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने बाजी मार ली। वहीं, बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा दूसरे नंबर पर रहे। तीसरे स्थान पर आरजेडी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता रहीं।
मुकाबले में प्रशांत किशोर ने भाजपा के गढ़ में सीधी सेंध लगाते हुए बड़ा उलटफेर किया। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों के भारी अंतर से पराजित किया है। प्रशांत किशोर की इस बड़ी जीत ने यह साबित कर दिया है कि बांकीपुर की जनता ने बदलाव के पक्ष में अपना जनादेश दिया है।
सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई है। 31 सालों से यहां भाजपा जीत रही थी लेकिन इस बार बाजी पलट गई है।इस सीट पर बीजेपी की ओर से घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने अंतिम समय में पारिवारिक कारण बताते हुए 10 जुलाई को अपना नामांकन वापस ले लिया था.
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मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया है। आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट मिले। वहीं आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव ‘मंडल’ को 22,527 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।घनश्याम सिंह 72 साल के नेता हैं और पहले भी दो बार विधायक रह चुके हैं। दतिया सीट से नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने की भी खूब चर्चा रही। पार्टी के इस फ़ैसले के बाद उनके समर्थकों में नाराज़गी भी देखी गई थी।
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गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के ही सतेंद्रभाई पटेल चुनाव जीते हैं। यहां पार्टी के कैंडिडेट सतीश पटेल को 30630 वोटों से जीत मिली है। इसके साथ ही यहां भाजपा का दबदबा कायम रहा है। एक बार फिर भाजपा ने अपने इस गढ़ को बचा लिया है। भाजपा की इस विधानसभा में यह लगातार 9वीं जीत है। इस सीट पर भाजपा के ही विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद चुनाव हुआ था। 2012 के चुनाव से पहले तक वडोदरा शहर की इस सीट को रावपुरा के नाम से जाना जाता था. लेकिन 2008 के परिसीमन में नाम बदला।
योगेश पटेल को 2022 में 1 लाख वोटों से जीत मिली थी, लेकिन इस बार आंकड़ा 30 हजार पर ही सिमट गया। योगेश पटेल को काका के नाम से जाना जाता था और वह इलाके में लोकप्रिय थे।
इस तरह तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को 2-1 से झटका लगा है। इन सीटों पर 30 जुलाई को वोटिंग हुई थी।
