बिना किसी चर्चा के सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित,
Delhi 03 August 2026,
को संसद के मानसून सत्र के 11वें दिन लोकसभा और राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही। लेकिन महत्वपूर्ण विधायी कार्य हंगामे के बीच पूरे किए गए। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा नीट पेपर लीक के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर दान में कथित चोरी के मुद्दों पर हंगामा किया। जिसके चलते सदन को पहले दोपहर 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। भारी शोर-शराब के बीच लोकसभा ने बिना किसी व्यापक चर्चा के सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जिसके तहत मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाकर 38 कर दी गई है। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 और बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पेश किए।
राज्यसभा की कार्यवाही का विपक्ष ने विरोध किया।केंद्रीय गृह मंत्री की अनुपस्थिति और अन्य मुद्दों पर विपक्षी सांसदों ने तख्तियां लहराईं और नारेबाजी की, जिसके कारण सभापति ने सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। एमएसएमई बिल राज्यसभा में पास हो गया। स्थगन से पहले और हंगामे के बीच राज्यसभा ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पास कर दिया।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 और एमएसएमई से जुड़ा एक अहम विधेयक बिना विपक्ष की ओर से चर्चा के पास हो गया। इसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।विपक्ष ने चर्चा के बजाय केवल हंगामा किया।
रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा संशोधन विधेयक और राज्यसभा में एमएसएमई से संबंधित विधेयक पारित किया गया। सरकार चाहती थी कि इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर सभी सांसद अपनी राय रखें, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी कहा कि सांसदों को चर्चा में भाग लेने के लिए समझाएं, लेकिन कांग्रेस में कोई ऐसा नहीं है जो अपने सांसदों को समझा सके. कांग्रेस के सांसद पूरी तरह बिगड़ चुके हैं। पार्टी के पास ऐसा कोई नेता नहीं बचा है जो उन्हें सही रास्ता दिखा सके. विपक्ष की अपनी मांगें हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर विधेयक बिना चर्चा के पारित हो। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेगा।
