Recent Posts

August 31, 2026

उज्बेकिस्तान-भारत द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं ,अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का हुआ आदान-प्रदान

Delhi, 30 August 2026महत्वपूर्ण ,

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 से 30 अगस्त, तक उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर, उज्बेकिस्तान की यात्रा पर उज्बेकिस्तान पहुंचे हैं। शावकत मिर्जियोयेव और प्रधानमंत्री मोदी ने , मैत्रीपूर्ण और रचनात्मक माहौल में वार्ता कीत। उज्बेकिस्तान-भारत द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं, पारस्परिक हित और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान और आगे व्यावहारिक सहयोग के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की हुई।

दोनों नेताओं ने उज्बेकिस्तान और भारत के बीच मजबूत सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह संबंधित लंबे समय से चली तततछततय रही मित्रता के बंधन के साथ-साथ दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित है। अपने साझा संकल्प की पुष्टि करते हुए, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने और सहयोग को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने की प्रतिबद्धता पर बल दिया, जो दोनों देशों के मूल हितों को आगे बढ़ाएगी।

दोनों नेताओं ने अपने विचारों की निकटता और मध्य एशिया के बढ़ते महत्व का स्वागत किया। जटिल भू-राजनीतिक स्थिति के बीच, उन्होंने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया। अपने बहुपक्षीय सहयोग, व्यापक रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर, उन्होंने दोनों देशों के लोगों और भावी पीढ़ियों के हित में दीर्घकालिक, पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और व्यापार, अर्थव्यवस्था और निवेश, परिवहन संपर्क, डिजिटल परिवर्तन (आईटी, एआई, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा), ऊर्जा परिवर्तन, महत्वपूर्ण खनिज, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक संवाद और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को औुय मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।मयक्ष

राजनीतिक, संसदीय और सुरक्षा सहयोग:

नेताओं ने नेतृत्व और संस्थागत स्तरों पर नियमित और विश्वास-आधारित संवाद बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया और द्विपक्षीय प्रारूप में तथा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान यात्राओं और संपर्कों का आदान-प्रदान जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और व्यवस्थाओं के कार्यान्वयन के उच्च स्तरीय समन्वय और निगरानी के साथ-साथ प्राथमिकता वाली द्विपक्षीय पहलों और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में आसानी के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक प्रणाली स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। नेताओं ने संसदीय कूटनीति की बढ़ती भूमिका को स्वीकार किया और उज्बेकिस्तान की ओली मजलिस और भारत की संसद के सदनों के बीच संपर्कों के गहन होने का स्वागत किया, जिसमें संसदीय मैत्री समूहों के बीच सहयोग और अंतरराष्ट्रीय अंतर-संसदीय सं गठनों के भीतर बातचीत शामिल है।

दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट रूप से निंदा की, आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता को दोहराया और किसी भी आधार पर आतंकवाद के औचित्य को पूरी तरह से खारिज कर दिया। नेताओं ने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने और आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और उनके बुनियादी ढांचे को नष्ट करने का आह्वान किया। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनके अपराधियों, समर्थकों, सहायकों और सहयोगियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। नेताओं ने कानून प्रवर्तन, खुफिया जानकारी साझा करने और हिंसक उग्रवाद, अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और साइबर खतरों से निपटने में सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। नेताओं ने आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह के तहत निरंतर सहयोग के महत्व की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने नियमित आदान-प्रदान, संस्थागत तंत्र, क्षमता निर्माण और संयुक्त गतिविधियों सहित उज्बेकिस्तान और भारत की रक्षा एवं सुरक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ते सहयोग और घनिष्ठ समन्वय की सराहना की और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में इस तरह के सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। नेताओं ने सैन्य सहयोग पर संयुक्त कार्य समूह की गतिविधियों पर संतोष व्यक्त किया, जिसमें रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने उज्बेकिस्तान-भारत संयुक्त सैन्य अभ्यास “दुस्तलिक” के सफल संचालन का स्वागत किया, जिसका नवीनतम अभ्यास अप्रैल 2026 में उज्बेकिस्तान के नमंगन क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

‌दोनों नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संगठनों में आपसी सहयोग सहित अपने सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, जिसमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है, में व्यापक सुधार का आह्वान किया, ताकि समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के मुद्दों से निपटने में इसे अधिक प्रतिनिधि, प्रभावी और कुशल बनाया जा सके। उज्बेकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन दोहराया।

राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2026 में ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता के लिए बधाई दी और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी में उनकी सफलता की कामना की।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2027-2030 की अवधि के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) की सफल अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान के प्रति विश्वास व्यक्त किया और इसके संस्थापक सदस्य के रूप में आंदोलन को समर्थन देना जारी रखने के लिए भारत की तत्परता की पुष्टि की।दोनों नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मंच के रूप में अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) और अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस (आईएसए) की भूमिका को चिन्हित किया। भारतीय पक्ष ने इन ढांचों में शामिल महत्वपूर्णहोने में उज्बेक पक्ष की रुचि का स्वागत किया और इनके लिए आवश्यक परामर्श और प्रक्रियाओं को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने की अपनी तत्परता व्यक्त की।

 

Share

You may have missed

Copyright2017©Spot Witness Times. Designed by MTC, 9084358715. All rights reserved. | Newsphere by AF themes.