November 3, 2026

विरासत महोत्सव में सूफियाना संगीत से शास्त्रीय नृत्य और ओसमान मीर के गायन तक सजी सुरों की महफिल

Virasat

विरासत महोत्सव-2026 में संगीत और नृत्य की विविध विधाओं से सजी सांस्कृतिक संध्याओं का सिलसिला लगातार दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। महोत्सव के मंच पर जहां युवा प्रतिभाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, वहीं देश के प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य कलाकारों और सुप्रसिद्ध गायक ओसमान मीर की प्रस्तुतियों ने शाम को यादगार बना दिया।

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत कैंब्रियन हॉल के 54 छात्र-छात्राओं की सूफियाना संगीत प्रस्तुति से हुई। विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध सूफी गायक नुसरत फतेह अली खान के लोकप्रिय गीत ‘सांसों की माला’ को सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की मधुर आवाजों और शानदार सामूहिक तालमेल ने माहौल को सूफियाना रंग में रंग दिया। प्रस्तुति के दौरान दर्शक भी संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए। इस प्रस्तुति में राशि चौहान, ज़रिया मॉरिस, निष्ठा कपूर, काव्या सिंह, प्रियंशी कौंडल, काव्या जटवानी, अदिति सेमवाल, अंशिका राणा, सांझ आहूजा, ओस आहूजा, परिशि गोयल, अनन्या जैन, अगम्या गुप्ता, अर्चिषा मोगा, मानसी ठाकुरी, शिवांगी श्रेष्ठा, ज़हीन हयात, आदर्श कुमार, देव खट्टक, मिद्दत रहमान, राशि थापा, पल पुंडीर, शौर्य वीर, रिद्धिम मेहरा, प्रियांशु मिश्रा, शिवांश डंगवाल, दर्श खट्टक सहित अन्य विद्यार्थियों ने भाग लिया।

इसके बाद मंच पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की तीन प्रमुख विधाओं भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की संयुक्त प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। इस विशेष प्रस्तुति में भरतनाट्यम नृत्यांगना आरोही मुंशी, ओडिसी कलाकार वाणी माधव और कथक नृत्यांगना मौमाला नायक ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संगीत निर्देशन और गायन सुधा रघुरामन ने किया।

प्रस्तुति की शुरुआत नागेंद्र राग से हुई। इसके बाद यमन और शिवरंजनी रागों में झपताल पर आधारित दो रचनाएं प्रस्तुत की गईं। तीनों नृत्य शैलियों की भाव-भंगिमाओं, लय और ताल के सुंदर समन्वय ने मंच पर भारतीय शास्त्रीय कला का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। वाद्य संगत में प्रफुल्ल कुमार मंगराज ने पखावज, एम.वी. चंद्रशेखर ने मृदंगम, अब्दुल रहमान ने तबला और जय रघुरामन ने बांसुरी पर साथ दिया।

भरतनाट्यम कलाकार आरोही मुंशी ने अपनी प्रस्तुति में पारंपरिक नृत्य शैली के साथ आधुनिक कलात्मक संवेदनाओं का सुंदर समन्वय किया। भोपाल से संबंध रखने वाली आरोही ने अपनी माता और प्रसिद्ध नृत्यांगना डॉ. लता मुंशी के मार्गदर्शन में भरतनाट्यम का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वहीं, कथक नृत्यांगना मौमाला नायक ने अपनी प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक बारीकियों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति का प्रदर्शन किया। वह पंडित बिरजू महाराज की शिष्या और दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार हैं। उन्हें कथक के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी मिल चुके हैं।

ओडिसी नृत्यांगना वाणी माधव ने भी अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को प्रभावित किया। चार दशकों से अधिक के अनुभव वाली वाणी माधव वरिष्ठ कलाकार, शोधकर्ता, कोरियोग्राफर और शिक्षिका हैं। उन्होंने गुरु गजेंद्र पांडा और प्रख्यात गुरु सुधाकर साहू से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। गुरुग्राम स्थित अपने संस्थान ‘नृत्य धारा’ के माध्यम से वह नई पीढ़ी को ओडिसी नृत्य की शिक्षा दे रही हैं। तीनों कलाकारों की संयुक्त प्रस्तुति ने विरासत की सांस्कृतिक संध्या को शास्त्रीय संगीत और नृत्य के रंगों से सराबोर कर दिया।

सांस्कृतिक संध्या का एक अन्य प्रमुख आकर्षण सुप्रसिद्ध गायक ओसमान मीर और आमिर मीर की गायन प्रस्तुति रही। दोनों कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज और प्रभावशाली गायकी से ऐसा समां बांधा कि दर्शक देर तक संगीत की लय में डूबे रहे। ओसमान मीर की गायकी में शास्त्रीय संगीत, सूफी परंपरा, गजल, भजन और गुजराती लोक संगीत का अनूठा मिश्रण देखने को मिला।

गुजरात के कच्छ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले ओसमान मीर का संगीत से जुड़ाव बचपन से रहा है। उनके पिता तबला वादक थे और गुजराती लोकगीतों, भजनों तथा संतवाणी गायकों के साथ संगत करते थे। ओसमान ने भी शुरुआत में अपने पिता से तबला सीखा और कम उम्र में ही उनके साथ मंचीय प्रस्तुतियां देने लगे। बाद में गायन के प्रति रुचि बढ़ने पर उन्होंने पिता से संगीत की शिक्षा ली और गुरु इस्माइल दातार से प्रशिक्षण प्राप्त किया। मोरारी बापू के आश्रम में प्रस्तुतियों के बाद उनकी गायन यात्रा को नई पहचान मिली।

ओसमान मीर ने गुजराती फिल्मों में पार्श्व गायन के साथ देश-विदेश के अनेक मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। वह अब तक लगभग 58 गुजराती फिल्मों के लिए गा चुके हैं और 25 देशों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उनकी गायकी पर नुसरत फतेह अली खान, मेहदी हसन, जगजीत सिंह और गुलाम अली जैसे दिग्गज कलाकारों का प्रभाव रहा है। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ में उनके गायन ने भी उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।

विरासत के मंच पर ओसमान मीर और आमिर मीर के साथ तबले पर अब्दुल मीर और अय्यूब मीर, ढोलक पर हारून, ऑक्टोपैड पर इरशाद, कीबोर्ड पर चंदन और प्रसन पर युसुफ ने संगत की। सुरों, ताल और लोक संगीत के इस संगम ने दर्शकों को संगीत की विविध परंपराओं का आनंद दिया।

युवा विद्यार्थियों की सूफियाना प्रस्तुति से लेकर भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक के शास्त्रीय सौंदर्य तथा ओसमान मीर की सुरीली गायकी तक, विरासत महोत्सव की यह सांस्कृतिक संध्या भारतीय संगीत और नृत्य की विविधता, परंपरा और नई पीढ़ी की प्रतिभा का खूबसूरत उत्सव बन गई।

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