May 30, 2026

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में बोले गणेश जोशी, खरीफ सत्र की सभी तैयारियां पूरी

उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान 2026 के समापन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की, जबकि आचार्य देवव्रत विशेष रूप से उपस्थित रहे। दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने खेती-किसानी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

अपने संबोधन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह सम्मेलन केवल खरीफ फसलों की तैयारियों और चुनौतियों पर चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच कृषि क्षेत्र के विकास तथा किसानों के उत्थान के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से राज्यों के नवाचारों और सफल प्रयोगों को साझा करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की भौगोलिक और कृषि-जलवायु परिस्थितियां विविध फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। खरीफ सत्र 2026 के लिए राज्य में बीज, खाद और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 90 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमान्त श्रेणी के हैं, जिनकी छोटी और बिखरी हुई जोतें कृषिकीकरण की राह में बड़ी चुनौती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार क्लस्टर खेती को बढ़ावा दे रही है।

गणेश जोशी ने कहा कि उर्वरकों की खपत कम करने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने के उद्देश्य से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। “धरती माता बचाओ अभियान” के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।

उन्होंने बताया कि परम्परागत कृषि विकास योजना और नमामि गंगे योजना के माध्यम से प्रदेश में जैविक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब तक लगभग 2.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल को जैविक खेती के अंतर्गत लाया जा चुका है, जो राज्य के कुल कृषि क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत है। जैविक उत्पादों के विपणन के लिए प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर 337 जैविक आउटलेट स्थापित किए गए हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र पोषित राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत प्रदेश के 11 जनपदों में 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में कार्य किया जा रहा है। वहीं राज्य सरकार की “नमामि गंगे प्राकृतिक कृषि कॉरिडोर योजना” के तहत 1950 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कार्य शुरू किया गया है।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक मिलेट फसलों के प्रोत्साहन और संवर्द्धन के लिए 134.89 करोड़ रुपये की स्टेट मिलेट पॉलिसी लागू की गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार की एफपीओ योजना के तहत प्रदेश में अब तक 161 कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया जा चुका है और प्रत्येक विकासखंड में एफपीओ की स्थापना सुनिश्चित की गई है।

कार्यक्रम के अंत में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में हुए व्यापक मंथन से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था के लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के सामूहिक प्रयासों से कृषि क्षेत्र समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

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