June 24, 2026

गृह मंत्री अमित शाह पर हत्या में शामिल होने संबंधी मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई।

दिल्ली , लोकसभा में विपक्ष के नेता और सांसद राहुल गांधी को, बीजेपी की आलोचना करते हुए अमित शाह पर हत्या में शामिल होने संबंधी मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले को रद्द करने की मांग वाली गांधी की याचिका पर झारखंड सरकार और शिकायतकर्ता से भी जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि, शिकायत किसी तीसरे पक्ष की ओर से दायर की गई थी और मानहानि के अपराध के मामले में ऐसा करना स्वीकार्य नहीं है। सिंघवी ने पूछा, यदि आप पीड़ित व्यक्ति नहीं हैं, तो आप शिकायत दर्ज करने के लिए प्रॉक्सी कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

बीजेपी नेता नवीन झा ने राहुल गांधी के खिलाफ झारखंड के रांची की मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत दर्ज कराई। जिसमें आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने 18 मार्च 2018 को बीजेपी की आलोचना करते हुए भाषण दिया और अमित शाह पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। शुरू में रांची की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने झा की शिकायत को खारिज कर दिया। इसके बाद रांची में न्यायिक आयुक्त के समक्ष एक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई। न्यायिक आयुक्त ने इसे मजिस्ट्रेट कोर्ट में वापस भेजा। न्यायिक आयुक्त ने मजिस्ट्रेट को रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य की फिर से समीक्षा करने के संबंध में एक नया आदेश जारी करने का निर्देश दिया।

इसके बाद मजिस्ट्रेट ने 28 नवंबर 2018 को एक नया आदेश पारित किया और निष्कर्ष निकाला कि भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने के लिए पर्याप्त सबूत थे। मजिस्ट्रेट ने राहुल गांधी को हाजिर होने के लिए समन जारी किया‌। राहुल गांधी ने इसके बाद रांची न्यायिक आयुक्त के 15 सितंबर, 2018 के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया। झारखंड हाई कोर्ट ने मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार किया था।

राहुल गांधी ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

 

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