उत्तराखंड के रेशम उद्योग में नई पहल, पहली बार लगेंगे ‘वी-1’ प्रजाति के शहतूत के पौधे
उत्तराखंड के रेशम उद्योग को नई दिशा देने के लिए राज्य में पहली बार शहतूत की उन्नत ‘वी-1’ प्रजाति के पौधों का रोपण किया जाएगा। अब तक प्रदेश में केवल ‘एस-146’ प्रजाति के शहतूत के पौधे लगाए जाते थे, लेकिन बेहतर उत्पादन और उच्च गुणवत्ता वाले रेशम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस नई प्रजाति को शामिल किया गया है। इसके लिए महाराष्ट्र के अकोला और अमरावती से वी-1 प्रजाति के पौधे मंगाए गए हैं।
रेशम विभाग के कुमाऊं मंडल के उपनिदेशक हेम चंद्र ने बताया कि आगामी 15 जुलाई को हरेला पर्व के अवसर पर कुमाऊं मंडल के 43 राजकीय शहतूत उद्यानों में से चयनित उद्यानों में वी-1 प्रजाति के पौधों का रोपण शुरू किया जाएगा। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी फार्मों और निजी किसानों के खेतों को मिलाकर 2 लाख 80 हजार शहतूत के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
विभाग ने इस वर्ष कुमाऊं मंडल में 99,100 किलोग्राम कोया (कोकून) उत्पादन का लक्ष्य भी तय किया है। अधिकारियों का मानना है कि नई प्रजाति के पौधों से रेशम की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे रेशम उत्पादन को नई गति मिलेगी।
उपनिदेशक हेम चंद्र ने बताया कि कुमाऊं मंडल में रेशम कीट पालन का व्यवसाय लगातार विस्तार कर रहा है। वी-1 प्रजाति के पौधों के रोपण से किसानों को अधिक पत्तियां और बेहतर गुणवत्ता का चारा उपलब्ध होगा, जिससे कोकून उत्पादन बढ़ेगा और उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल रेशम उद्योग को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और काश्तकारों के लिए स्वरोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।
हेम चंद्र उपनिदेशक रेशम विभाग
