उत्तराखंड में लगातार भूकंप के झटकों पर वैज्ञानिक की सलाह, कमजोर इमारतों से होता है ज्यादा नुकसान
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार महसूस किए जा रहे भूकंप के झटकों के बीच वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी के बड़कोट के नजदीक हाल ही में कम तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 रही।
डॉ. नरेश कुमार के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 से 12 किलोमीटर की गहराई में था। कम गहराई पर आने वाले ऐसे भूकंपों को ‘शैलो फोकस’ यानी उथले केंद्र वाला भूकंप कहा जाता है। उन्होंने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।
उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और आसपास के पर्वतीय इलाके भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं। इन क्षेत्रों में पहले भी बड़े भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। वर्ष 1991 में उत्तरकाशी में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जबकि वर्ष 2007 में 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था।
डॉ. नरेश कुमार ने आम लोगों से भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बहुमंजिला इमारत में है तो झटकों के दौरान मजबूत दीवार या टेबल के पास सुरक्षित स्थान पर बैठ जाए। भूकंप के झटके पूरी तरह थमने के बाद ही सावधानीपूर्वक बाहर निकलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने में भवनों की मजबूती की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके मुताबिक अक्सर नुकसान भूकंप से ज्यादा कमजोर और असुरक्षित इमारतों के कारण होता है।
वैज्ञानिक ने उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में भवन निर्माण के दौरान भूकंपरोधी मानकों का पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में भवनों का निर्माण मजबूत आरसीसी (RCC) तकनीक और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि भूकंप को लेकर अफवाहों पर ध्यान न दें और आपदा की स्थिति में प्रशासन एवं विशेषज्ञों की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
डॉ नरेश कुमार वैज्ञानिक ई वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून