तय फुटपाथ पर चलने का फंडामेंटल राइट, मोटर वाली गाड़ी के प्रिविलेज से ऊपर होगा: सुप्रीम कोर्ट।
Delhi 19 Jun 2026,
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में, फुटपाथ पर चलने के अधिकार को संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार माना है। जिसमें सुरक्षित और अच्छी तरह से चिह्नित फुटपाथ तक पहुंचने का अधिकार भी शामिल है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तय किए गए फुटपाथ पर चलने के अधिकार का कोई भी उल्लंघन होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुआवजे और भरपाई के लिए संवैधानिक कानूनी उपायों का सहारा लिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा, ने कहा, प्रत्येक सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तय हो और उसे मेंटेन किया जाए। तय फुटपाथ पर चलने का फंडामेंटल राइट, मोटर वाली गाड़ी के प्रिविलेज से ऊपर होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक पांच साल के लड़के की मौत के मामले में दिया। जिसे अपने पिता के साथ पड़ोस के स्कूल जाते समय एक ट्रक ने कुचल दिया था।
फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार:
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि चौड़े फुटपाथ पर सुरक्षित और बेफिक्र होकर चलना, हर मोड़ पर बिना किसी खतरे के, सबसे बेसिक राइट्स है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “यह सबसे आसान इंसानी काम है, जो जिंदगी से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथों पर चलने की स्वतंत्रता को एक मौलिक अधिकार घोषित किया है। मोटर चालित वाहनों द्वारा फुटपाथ पर पैदल चलने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी।
फुटपाथ को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा, चलने के बुनियादी अधिकार के लिए बस एक आरामदायक जगह चाहिए जहां आसानी से और बेफिक्र होकर चला जा सके। कोर्ट ने सवाल उठाया कि, क्या यह एक म्युनिसिपल अथॉरिटी की नागरिकों के प्रति कम से कम जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए? कोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 ने कभी भी पैदल चलने के मौलिक अधिकार को पहचानने की जरूरत नहीं समझी है।
