3.15 लाख करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना सहित अनेक योजनाओं को मंत्री मंडल ने दी मंजूरी,
Delhi 31 July 2026,
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 84,084 करोड़ रुपये की‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना, 36,441 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय के साथ विस्तारित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल संघों (एएनएसएफ) को बढ़ी हुई सहायता योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन और 5,070 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ईएसएस) सहित फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (एफएसपीवी) परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
* केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी है। यह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है और इसके लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्यान्वयन हेतु 84,084 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है।
इस योजना के अंतर्गत अपतटीय अन्वेषण (ऑफशोर एक्सप्लोरेशन) की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में विभिन्न तरह के उपाय शामिल हैं। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले भूकंपीय (सिस्मिक) डेटा को बड़े पैमाने पर एकत्रित करना, उसका विश्लेषण एवं व्याख्या करना; गहरे पानी व बहुत गहरे पानी में तेजी से अन्वेषण करने वाली ड्रिलिंग करना, नए एवं कम खोजे गए बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग करना, अपतटीय उत्पादन एवं निकासी हेतु साझा बुनियादी ढांचा विकसित करना; और एक एकीकृत तेल एवं गैस मैन्यूफैक्चरिंग तथा सेवा परिक्षेत्र की स्थापना करना शामिल है। इसमें डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन, क्षमता विकास, तकनीक को अपनाने, हितधारकों को शामिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने के विशेष प्रावधानों का भी समावेश है ताकि देश में अपतटीय अन्वेषण एवं उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जा सके और एक एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।
* केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 36,441 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय के साथ विस्तारित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल संघों (एएनएसएफ) को बढ़ी हुई सहायता को मंजूरी दे दी है। यह युवा विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए खेलों की शक्ति का उपयोग करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
स्वीकृत परिव्यय पिछली खेलो इंडिया योजना की तुलना में लगभग आठ गुना है, जो खेलों को युवा विकास, राष्ट्र-निर्माण और वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में भारत के उद्भव की आधारशिला बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संशोधित योजना को स्कूल के खेल के मैदानों और गांव के खेल के मैदानों से लेकर ओलंपिक पोडियम तक प्रत्येक प्रतिभाशाली युवा भारतीय के लिए एक सहज मार्ग बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
खेलो भारत नीति 2025 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप, यह योजना 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए देश की दावेदारी सहित भारत की दीर्घकालिक खेल महत्वाकांक्षाओं के लिए एक मजबूत नींव रखते हुए शिक्षा, फिटनेस, प्रौद्योगिकी और श्रेष्ठ प्रदर्शन प्रशिक्षण के साथ खेलों को एकीकृत करती है।
* केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इस अवधि के दौरान इस योजना के लिए कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन स्वीकृत किया गया है।
इस मंजूरी से सरकार की इस प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है कि किसानों की समृद्धि ही राष्ट्र की समृद्धि की नींव है। प्रधानमंत्री-किसान योजना के माध्यम से, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली द्वारा पात्र किसान परिवारों को समय पर और पारदर्शी आय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे किसानों को कृषि निवेश बढ़ाने और अपनी आजीविका को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
पीएम-किसान: पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित किसान कल्याण का एक सफल मॉडल,
प्रधानमंत्री-किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत, पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और एक मजबूत नव पंप
डीबीटी प्रणाली के माध्यम से, इस योजना ने पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही का एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
* केन्द्रीय मंत्री मंडल ने आज 5,070 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालीडग (ईएसएस) सहित फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (एफएसपीवी) परियोजनाओं के विकास की योजना ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (पीएम-एसएसवाई)’ को मंजूरी दी।
इस योजना के अंतर्गत 5,000 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टाइक प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे, जिनमें कम से कम दो घंटे की भंडारण क्षमता वाले यानी 10,000 मेगावाट-घंटे के ऊर्जा भंडारण सिस्टम भी शामिल होंगे। इन परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 के दौरान मंजूरी दी जाएगी और वित्त वर्ष 2032-33 तक वित्तीय सहायता का संवितरण जारी रहेगा।
यह मंजूरी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (एनआईएसई) द्वारा किए गए हाल के आकलन के बाद दी गई है, जिसमें देश के जलाशयों और अन्य उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में लगभग 102.18 गीगावॉट की फ्लोटिंग सोलर क्षमता का अनुमान लगाया गया है।
इस योजना से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लाभ होगा। इस योजना से देश में फ्लोटिंग सोलर पीवी (पीवी) क्षमता में 5,000मेगावाट की वृद्धि होगी, जो वर्तमान में लगभग 700 मेगावाट ही है। इन परियोजनाओं से विद्यमान जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का लाभकारी उपयोग करने का अवसर मिलेगा और दुर्लभ भूमि संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा समाप्त होगी। ऊर्जा भंडारण प्रणाली के एकीकरण से ग्रिड की विश्वसनीयता सुदृढ़ होगी। इस योजना से प्रतिवर्ष लगभग 10 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे परियोजना मूल्य श्रृंखला में लगभग 16,000-17,000 पूर्णकालिक समकक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह योजना फ्लोटेशन सिस्टम के साथ-साथ पीवी सेल, मॉड्यूल, ऊर्जा भंडारण प्रणाली आदि जैसी परियोजनाओं की पूरी मूल्य श्रृंखला के घरेलू विनिर्माणऊचं को बढ़ावा देगी और आत्मनिर्भर भारत के विजन में सहायता करेगी।
