सेब की आधुनिक बागवानी सीखने हिमाचल जाएंगे उत्तराखंड के 28 किसान, गणेश जोशी ने दिखाई हरी झंडी
उत्तराखंड में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने पहल की है। इसी क्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने मंगलवार को हाथीबड़कला स्थित कैंप कार्यालय से देहरादून जनपद के 28 किसानों के दल को पांच दिवसीय प्रशिक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश रवाना किया। उन्होंने किसानों के दल को डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौणी, सोलन के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सेब उत्पादन की आधुनिक एवं उच्च तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इसमें पौधों की कटाई-छंटाई, फल पौध रोपण, उर्वरक प्रबंधन, जैविक खाद का उपयोग, बडिंग एवं ग्राफ्टिंग, फलों की पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसान इन तकनीकों को अपने बागानों में अपनाने के साथ अन्य किसानों को भी आधुनिक बागवानी के प्रति जागरूक करेंगे। इससे प्रदेश में सेब उत्पादन और उत्पादकता बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
808.79 करोड़ की लागत से संचालित हो रही अति सघन सेब बागवानी योजना
कृषि मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और किसानों की आर्थिकी मजबूत करने के लिए क्लस्टर आधारित खेती तथा उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में 808.79 करोड़ रुपये की लागत से सेब की अति सघन बागवानी योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सेब के बागान विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना के तहत 144.55 करोड़ रुपये की लागत से सीए स्टोरेज और सॉर्टिंग-ग्रेडिंग इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इस योजना में 50 से 70 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 80 करोड़ रुपये की लागत से सेब की अत्याधुनिक नर्सरी योजना संचालित की जा रही है, जिसके तहत 400 एकड़ क्षेत्रफल में नर्सरी स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कीवी उत्पादन और मधुमक्खी पालन का भी मिलेगा प्रशिक्षण
गणेश जोशी ने कहा कि सेब की अति सघन बागवानी से पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन रोकने में मदद मिलेगी। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें आधुनिक कृषि एवं बागवानी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में जिला योजना और राज्य सेक्टर की योजनाओं के माध्यम से समय-समय पर किसानों का चयन कर उन्हें प्रदेश के भीतर और बाहर प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके तहत कीवी फल उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में भी किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि किसानों को आधुनिक तकनीकों, बेहतर उत्पादन प्रणाली और बाजार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि की जाए। सेब की अति सघन बागवानी योजना पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने और पलायन पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
