मुनस्यारी में 43 मधुपालकों को मिले मधुमक्खी पालन बॉक्स, हनी क्लस्टर बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री बॉर्डर एरिया विकास योजना (एमबीएडीपी) के तहत स्वीकृत योजना के अंतर्गत सोमवार को मुनस्यारी क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों के 43 मधुपालकों को मधुमक्खी कॉलोनियों सहित बॉक्स वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र को हनी क्लस्टर के रूप में विकसित कर स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में निर्वतमान जिला पंचायत सदस्य जगत सिंह मर्तोलिया ने लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन बॉक्स वितरित किए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और भविष्य में इसे एक संगठित हनी क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अपने जिला पंचायत सदस्य कार्यकाल के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री बॉर्डर एरिया विकास योजना के तहत 21 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कराई थी। इस योजना के अंतर्गत लीलम, दरकोट और सेविला न्याय पंचायत क्षेत्रों को हनी क्लस्टर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
योजना के तहत ग्राम पंचायत तल्ला दुम्मर, सेरासुराईधार, पैंकुती और बूंगा के 43 किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए बॉक्स उपलब्ध कराए गए। इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उद्यान विभाग पिथौरागढ़ को सौंपी गई है।
जगत सिंह मर्तोलिया ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायतों को पारंपरिक विकास कार्यों से आगे बढ़ते हुए “एक गांव, एक उत्पाद” की अवधारणा पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग की धनराशि का उपयोग रोजगारपरक योजनाओं में किया जाए। साथ ही सांसद और विधायक निधि का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा भी स्वरोजगार और आयवर्धन योजनाओं पर खर्च किए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार और विभागों के सहयोग से इस अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। मधुपालकों का एक फेडरेशन गठित कर उच्च गुणवत्ता वाले शहद को “मुनस्यारी अलपाइन हनी” ब्रांड के रूप में बाजार में उतारने की योजना है। उत्पाद को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना के तहत प्रत्येक गांव में शहद निकालने के लिए आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा मधुमक्खी पालन से संबंधित आवश्यक उपकरण और सामग्री भी लाभार्थियों को प्रदान की गई है, जिससे वे व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन कर सकें।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पहल सीमांत क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी तथा मुनस्यारी को शहद उत्पादन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होगी।
