मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच शांति के आसार: ईरान अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को छोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार,
Delhi 24 May 2026,
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच शांति के आसार नजर आने लगे हैं। ईरान और अमेरिका दोनों देशों में शांति की लगातार पहल की जा रही है, इसी बीच बड़ी खबर सामने आई है कि, ईरान एनरिच्ड यूरेनियम भंडार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता के तहत अपने सबसे खतरनाक और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को छोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस बात की पुष्टि की है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध को समाप्त करने और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस बात पर राजी हो गया है कि वह अपने पास मौजूद करीब-पीस-ग्रेड (वेपंस ग्रेड) के करीब पहुंच चुके यूरेनियम के भंडार को छोड़ देगा। हालांकि, यह समझौता अभी शुरुआती स्तर पर है। यूरेनियम को ईरान से बाहर कैसे भेजा जाएगा? इसे कैसे डाइल्यूट किया जाएगा? या बेअसर किया जाएगा, इसके सटीक नियमों और प्रक्रियाओं (मेकैनिज्म) पर आने वाले 30 से 60 दिनों के भीतर होने वाली परमाणु वार्ताओं में विस्तार से चर्चा की जाएगी। अमेरिका ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी कि अगर उसने शुरुआती समझौते में यूरेनियम पर प्रतिबद्धता नहीं जताई, तो बातचीत रद्द कर दी जाएगी और सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास फिलहाल 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के बेहद करीब माना जाता है।इजरायल और अमेरिका लगातार यह दावा करते रहे हैं कि अगर ईरान ने इसे थोड़ा और रिफाइन कर लिया, तो वह बहुत ही कम समय में कई परमाणु बम तैयार कर सकता है। यही कारण है कि, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और मुख्य वार्ताकारों ने इस स्टॉक को नष्ट करने या देश से बाहर भेजने की महत्वपूर्ण शर्त रखी है। युद्ध के भारी दबाव के चलते ईरान का यह कदम उसकी रणनीति में एक यू-टर्न माना जा रहा है। अभी कुछ दिनों पहले तक ईरानी सूत्रों का दावा था कि एक सख्त निर्देश जारी किया था कि देश का यूरेनियम भंडार किसी भी कीमत पर बाहर नहीं भेजा जाएगा। लेकिन अमेरिकी दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के चलते तेहरान को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस स्टॉक को ठिकाने लगाने के लिए साल 2015 के ओबामा काल के परमाणु समझौते जैसा फॉर्मूला अपनाया जा सकता है, जिसके तहत ईरान अपना यूरेनियम रूस को ट्रांसफर कर सकता है, या फिर इसकी शुद्धता को घटाकर इसे हथियारों के लिए बेकार किया जा सकता है।
वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी सहमति बनती दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस संभावित समझौते एमओयू में कुल 14 मुख्य मुद्दे शामिल हैं। इस समझौते का सबसे बड़ा तात्कालिक फायदा यह होगा कि ईरान और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जारी जंग पूरी तरह थम जाएगी। इसके अलावा, दुनिया के कुल तेल सप्लाई का पांचवां हिस्सा जहां से गुजरता है, उस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को व्यापार के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। ईरान के खिलाफ की गई नौसैनिक नाकेबंदी को अमेरिका हटाएगा, जिससे बिना किसी टोल या टैक्स के अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकेगी। हालांकि, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रबंधन अभी भी ईरान के हाथ में ही रहेगा।
अमेरिकी सूत्रों से बताया गया कि, यदि ईरान इस समझौते के लिए राजी नहीं होता, तो अमेरिका ने बेहद आक्रामक सैन्य रणनीति तैयार कर रखी थी। अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने हाल ही में ईरान के ‘इस्फहान परमाणु संयंत्र’ में जमीन के नीचे छिपे यूरेनियम भंडारों को निशाना बनाने के विकल्प तैयार किए थे। इन विकल्पों में जमीन को भेदने वाले भारी ‘बंकर-बस्टिंग’ बमों का इस्तेमाल शामिल था। एक समय पर राष्ट्रपति ट्रंप ने इस स्टॉक को जब्त करने के लिए अमेरिका-इजरायल के कमांडो ऑपरेशन की योजना पर भी विचार किया था, लेकिन हाई-रिस्क होने के कारण उसे मंजूरी नहीं दी गई। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा था, ‘या तो हम एक अच्छी डील पर दस्तखत करेंगे, या फिर हम उन्हें तबाह कर देंगे।’ इस समझौते के बदले में ईरान को एक बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। समझौते के तहत विदेशों में फ्रीज पड़े लगभग 25 अरब डॉलर के ईरानी फंड को धीरे-धीरे रिलीज किया जाएगा।
