सोशल मीडिया पर बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के मुद्दे को इतना भावनात्मक रूप से न लें: सुप्रीम कोर्ट,
Delhi 25 May 2026,
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एक वकील ने इस संबंध मेंं दायर जनहित याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की गुज़ारिश की थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को इससे संबंधित एक याचिकाकर्ता से कहा कि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के मुद्दे को इतना भावनात्मक रूप से न लें। इसके साथ ही भारत के मुख्य न्यायाधीश में इस मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया।
लाइव लॉ के मुताबिक़ अधिवक्ता एनके गोस्वामी ने दलील दी कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के कॉकरोच वाले बयान पर दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद ‘एक विकृत और दुर्भावनापूर्ण नैरेटिव’ लगातार जारी है। मुख्य न्यायधीश ने कहा कि फ़िलहाल इस केस को सुनने की तात्कालिक कोई ज़रूरत नहीं है और समय आने पर इसकी सुनवाई की जाएगी।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थकों का मानना है कि एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन है। जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद उभरा। इसमें मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि ऑनलाइन सक्रियता की आड़ में व्यवस्था पर हमला करने वाले बेरोज़गार युवाओं को ‘कॉकरोच’ जैसा माना जा सकता है बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्रीधारी रखने वाले व्यक्तियों की ओर था, ना कि सभी युवाओं के लिए।सोशल मीडिया अकाउंट्स पर फॉलोवर्स की अप्रत्याशित वृद्धि हुई ।
बता दें कि, अभिजीत दीपके नाम के शख़्स ने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की घोषणा की। देखते ही देखते उनके के अन्य दलों को पीछे छोड़ दिया। बाद में एक्स पर उनके अकाउंट को निलंबित कर दिया गया था जिसके कुछ घंटों बाद वो नए अकाउंट के साथ एक्स पर आ गए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉकरोच जनता पार्टी के बनने पर नेता शशि थरूर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मैं कॉकरोच जनता पार्टी के तेज़ी से उभरने को लेकर बेहद इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं।
उन्होंने लिखा, ”मैं युवाओं की निराशा को समझता हूं और यह भी देख पा रहा हूं वे इससे क्यों जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। यही वजह है किीकि एक्स पर इस अकाउंट को रोका जाना बेहद नुक़सानदेह और समझदारी से परे है।
वहीं पिछले सप्ताह राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा, “यह जो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर एक मीम की तरह शुरू हुई, यह केवल हँसी-मजाक या गुस्सा नहीं है। देश के भीतर नीचे से एक सुगबुगाहट और छटपटाहट है क्योंकि व्यवस्था के बने-बनाए रास्ते और दरवाज़े बंद हो गए हैं। मजाक या चुटकुला हमेशा किसी न किसी गहरे दर्द से जुड़ा होता है, इसलिए हम इसका विश्लेषण मज़ाक में नहीं कर सकते। सरकार द्वारा इसे बैन करना एक गंभीर बदलाव की शुरुआत हो सकता है। योगेंद्र यादव ने कॉकरोच जनता पार्टी का बचाव किया, एक्स पर लिखा, “क्या मोदी सरकार को लगता है कि कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक करके वह जेनज़ी को रोक सकती है?”
तृणमूल कांग्रेस ने कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स हैंडल पर रोक लगाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ”ये लोकतंत्र नहीं। हमारी सरकार इस देश के युवाओं से इतनी डरी हुई है कि वह एक वर्चुअल ऑनलाइन आंदोलन तक को बर्दाश्त नहीं कर पा रही। शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर बनी सीजेपी जैसी एक कल्पनात्मक सोच का जेन ज़ी की कल्पना और भावनाओं पर छा जाना इस बात का दुखद संकेत है कि युवाओं ने मौजूदा विपक्षी दलों से उम्मीद खोनी शुरू कर दी है।
लेकिन वहीं एम नागेश्वर राव नाम के एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा था, कि कॉकरोच जनता पार्टी को देशविरोधी ताक़तें हवा दे रही हैं। वहीं नेहा सिंह नाम की यूज़र ने लिखा था, “कॉकरोच जनता पार्टी से दरअसल बीजेपी को ही फ़ायदा होगा, क्योंकि इससे जुड़ने वाले ज़्यादातर वो लोग हैं जो एंटी बीजेपी हैं और कांग्रेस और आप जैसी पार्टियों को सपोर्ट करते रहे हैं। लेकिन अब वो इन विपक्षी पार्टियों से निराश हो चले हैं तो वो सीजेपी को सपोर्ट कर रहे हैं. अगर ये पार्टी चुनाव लड़ती है तो कई एंटी बीजेपी इसको वोट देंगे. लेकिन बीजेपी का कोर वोटर तो कहीं जाने वाला नहीं है. ऐसे में विपक्षी वोट बंटेगा और फ़ायदा बीजेपी को होगा।
