October 6, 2026

सीईसी ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित पक्षों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब:कार्यप्रणातली में अवैधता पाई गई तो सभी फैसले रोकेंगे

 


Delhi 05 October 2026,

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले में एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चुनाव आयोग को जारी नोटिस में कहा गया है कि यदि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली में कोई अवैधता पाई जाती है, तो कोर्ट सभी फैसले रोक देगी। याचिकाएं चुनाव आयोग के फैसलों और एसआईआर की वैधता को चुनौती देते हुए दायर की गई थीं।

 चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र, चुनाव आयोग, सीईसी ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और डीजी (आईटी) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल एकतरफ अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों का जवाब लेना जरूरी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के(एसआईआर) बावजूद सीईओ ने कथित तौर पर एकतरफा फैसले लिए।

      याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एसआईआर फॉर्म-6 में बदलाव और आयोग के दूसरे फैसलों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। इसी आधार पर उन्होंने ज्ञानेश कुमार को सीईसी पद से हटाने या कम से कम अगली सुनवाई तक उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग की। 

   याचिकाकर्ता के अधिवक्ता उन्होंने कहा कि सीईसी CEC की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाला मामला बड़ी बेंच के सामने पेंडिंग है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अंतरिम कदम जरूरी हैं क्योंकि नागरिक अपने मताधिकार को लेकर चिंतित हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कानून की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के फैसले जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से और मतभेद होने पर बहुमत से लिए जाने चाहिए। उन्होंने धारा 16 का भी उल्लेख किया, जो आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में सीईसी को कानूनी संरक्षण देती है। अधिवक्ता ने कहा कि स्थिति गंभीर है और इससे लोकतंत्र की बुनियाद प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि अभी अंतरिम आदेश नहीं दिया गया तो स्थिति बिगड़ सकती है।

   इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यदि सीईसी को निलंबित किया जाता है तो चुनाव आयोग का कामकाज प्रभावित होगा और “चुनाव कौन कराएगा?” अधिवक्ता ने कहा कि बाकी दोनों चुनाव आयुक्त आयोग का काम संभाल सकते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अदालत आयोग को निर्देश दे कि सभी फैसले केवल सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाएं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “एक अनिवार्य कानून है और हम उम्मीद करते हैं कि वे उसका पालन करेंगे। अगर कोई उल्लंघन हुआ है तो हम उसे रद्द कर देंगे।

  जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि, कोर्ट सभी पक्षों को सुने बिना आदेश कैसे पारित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड से पता चलता है कि कोई फैसला सर्वसम्मति या बहुमत से नहीं लिया गया, तो कोर्ट उस फैसले पर रोक लगा सकता है और उसे अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर छू है। लेकिन सभी फैसलों को एकतरफा मानकर पहले ही निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। 

 


 

 

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