समाज के लिए अच्छा काम कर रहे लोगों को पहचानिए, उनकी सराहना कीजिए, उनसे सीखिए, और हो सके तो खुद भी किसी अच्छे काम से जुड़िए: मन की बात में बोले प्रधानमंत्री मोदी,
Delhi 31 May 2026,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात’ की 134वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित किया। इस बार प्रधानमंत्री ने एथलीट्स गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार के साथ संवाद किया। देश के ज्यादातर हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी का जिक्र किया और ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखने का सुझाव दिया। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने एस्ट्रोनॉमी क्लब और प्लैनेटेरियम, मनोरमा नदी से कचरा साफ कर स्वच्छता अभियान जैसे अनेक प्रेरणादाई प्रसंगों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात की शुरुआत, झारखंड के रांची में नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कंपटीशन से की। इसमें देशभर से आए करीब 800 एथलीट्स ने हिस्सा लिया। इस दौरान चार अलग-अलग इवेंट में चार नेशनल रिकॉर्ड टूटे। गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार। इन साथियों ने अलग-अलग कैटिगरी में नए रिकॉर्ड बनाए। प्रधानमंत्री ने इन सभी एथलीट से संवाद किया और इनको शुभकामनाएं प्रेषित की है ।

प्रधानमंत्री ने कहा इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप, गर्म हवाएँ, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें। इस दिशा में सरकार के भिन्न-भिन्न विभागों ने जो दिशा निर्देश जारी किए हैं उसका पालन करें।
प्रधानमंत्री ने एस्ट्रो केरला नाम की एक संस्था जो नाइट ऑब्जरवेशन कैंप और वर्कशॉप आयोजित करती है। यहां लोग टेलिस्कोप बनाना और स्टार मैप का इस्तेमाल करना सिखते है। प्रधानमंत्री ने राजकोट के बिग बैंग एस्ट्रोनॉमी क्लब, ‘ज्योतिर्विद्या परिसंस्था’, आईसैक का भी जिक्र किया। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में एक वीडियो साझा किया। जिसमें कुछ लोग बहुत सावधानी से एक गंगा डॉल्फिन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे प्रयास में करीब 13 घंटे लगे, और आखिरकार वो डॉल्फिन बच गई।
प्रधानमंत्री ने बताया कि, एक प्रेरक गाथा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आई है। बस्ती के आकाश गुप्ता अपने गाँव की मनोरमा नदी को देखकर बहुत दुखी होते थे। क्योंकि जिस नदी को उन्होंने बचपन में साफ और जीवंत देखा था। समय के साथ उस नदी में प्लास्टिक जमा होने लगा था। गंदगी बढ़ती चली जा रही थी। आकाश ने तय किया कि शिकायत नहीं करेंगे, एक नई शुरुआत करेंगे। शिकायत नहीं, शुरुआत मंत्र बन गया। उन्होंने अपने दोस्तों को साथ लिया। सिर्फ जाल था, फावड़ा था, टोकरी थी और सबसे बड़ी ताकत थी, कुछ बदलने का संकल्प। ये युवा नदी में उतरते थे, जलकुंभी निकालते थे। प्लास्टिक और कचरा बाहर लाते थे। कई बार एक दिन में 50-60 किलो तक कचरा नदी से निकाला गया। धीरे- धीरे मनोरमा नदी का वह हिस्सा फिर से साफ दिखने लगा। आसपास के लोगों का ध्यान भी इस काम की तरफ गया। लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी। प्रधानमंत्री ने गोवा के बालकृष्ण अइया जी रिटायर टीचर की प्रेरणादाई गाथा का जिक्र किया। समाज के लिए काम करने का उनका उत्साह आज भी वैसा ही है। उन्हें मड्डी-तोलाप इलाके में पानी की समस्या बहुत परेशान करती थी। उन्होंने भी समाधान के लिए काम शुरू किया। बालकृष्ण जी ने पाइपलाइन बिछाने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे कई घरों तक पानी पहुंचा। जिन परिवारों को पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ता था, उनके लिए यह बहुत बड़ी राहत बनी।
गिरिजा अम्मा जी करीब 15 स्कूल चलाती हैं। इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय बहुत प्रमुख है। उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के स्टूडेंट को प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर स्टूडेंट की ओर से 365 रुपये जमा हुए। इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए। गिरिजा अम्मा जी ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा। उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि माँ भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है।
प्रधानमंत्री ने मन की बात के समापन पर कहा, भारत के हर गाँव में, हर शहर में, कुछ-न-कुछ ऐसा हो रहा है जो हमें प्रेरणा देता है। कई बार, इन प्रयासों की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन जब हम इन्हें जानते हैं, तो ये विश्वास और मजबूत होता है, कि देश, अपने लोगों की शक्ति से आगे बढ़ रहा है। मेरा आपसे आग्रह है, अपने आसपास ऐसे प्रयासों को जरूर देखिए। जो लोग समाज के लिए अच्छा काम कर रहें हैं, उन्हें पहचानिए, उनकी सराहना कीजिए, उनसे सीखिए, और हो सके तो खुद भी किसी अच्छे काम से जुड़िए।
