टेक्नोवेशन 2026: एआई के भविष्य और शिक्षा में बदलाव पर मंथन
जौलीग्रांट स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) में आयोजित टेक्नोवेशन 2026 सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बदलते परिदृश्य और उसके शिक्षा, उद्योग व समाज पर प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने मानव-केंद्रित तकनीकी विकास की दिशा पर अपने विचार साझा किए।
आदि कैलाश सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ एसआरएचयू स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की निदेशक डॉ. तरुणा गौतम के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि छात्रों को समस्या समाधान, नेतृत्व क्षमता और नवाचार की सोच से लैस करना भी उतना ही जरूरी है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, शोध और उद्योग सहित लगभग हर क्षेत्र में परिवर्तन का माध्यम बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालयों को छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
कार्यक्रम में आरटपार्क के सह-संस्थापक उमाकांत सोनी ने एआई को केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि सभ्यता को बदलने वाली शक्ति बताया। वहीं श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की डॉ. सुजाता शाही ने कहा कि एआई मनुष्यों की जगह नहीं लेगा, लेकिन नौकरियों के स्वरूप को जरूर बदल देगा। उन्होंने स्कूल स्तर से ही एआई जागरूकता बढ़ाने और ज्ञान, विज्ञान व विवेक के संतुलन पर आधारित शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।
टाइम्सप्रो के पूर्व सीईओ अनीश श्रीकृष्णा ने कहा कि एआई ने उच्च शिक्षा व्यवस्था की कई कमजोरियों को उजागर किया है। उन्होंने चिंता जताई कि बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग स्नातक आज भी रोजगार के लिए तैयार नहीं हैं, ऐसे में संस्थानों को एआई के साथ तालमेल बैठाने की दिशा में काम करना होगा।
इग्नाइट एआई लैब्स, बेंगलुरु के संस्थापक किरण एनजी ने एआई के व्यावहारिक उपयोगों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि अब साधारण विद्यार्थी भी एआई की मदद से जटिल समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकते हैं।
सम्मेलन के दौरान विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर एप्लाइड एआई एंड एजुकेशन’ की स्थापना की घोषणा भी की गई, जो भविष्य में एआई आधारित शोध, प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा देने का प्रमुख केंद्र बनेगा।
टेक्नोवेशन 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि एआई केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज की संरचना को पुनर्परिभाषित करने वाली शक्ति बन चुका है। ऐसे में शिक्षा संस्थानों के लिए जरूरी है कि वे इस परिवर्तन को अपनाते हुए छात्रों को नई दुनिया के लिए तैयार करें।