मन की बात’ की 133वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम, यूरोपीय गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में भारतीय बेटियों की सफलता, आदि पर विचार साझा किए,
Delhi 26 April 2026,
आज रविवार 26 अप्रैल को प्रसारित ‘मन की बात’ की 133वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम, यूरोपीय गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में भारतीय बेटियों की सफलता, भारतीय उत्पाद चीज़ के स्थानीय से वैश्विक स्तर प्राप्त करने, गुरुदेव टैगोर का स्मरण, राष्ट्रीय उत्सव 23 से 30 जनवरी के बीच मनाए जाने वाले गणतंत्र महोत्सव और बीटिंग रिट्रीट जैसे अनेक समसामयिक प्रसंगों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि, ‘मन की बात’ के एक और एपिसोड में आप सबसे जुड़कर खुशी हो रही है। इधर, बीच, चुनाव की भागदौड़ रही है, लेकिन आपके पत्रों और संदेशों के माध्यम से हमने देश और देशवासियों की उपलब्धियों पर एक-दूसरे से अपनी खुशियाँ साझा भी की हैं। इस बार ‘मन की बात’ की शुरुआत देश की एक ऐसी ही बहुत बड़ी उपलब्धि से करते हैं। साथियो, भारत ने विज्ञान को हमेशा देश की प्रगति से जोड़कर देखा है। इसी सोच के साथ हमारे वैज्ञानिक सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों से यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण में अहम् योगदान दे रहा है। इससे हमारी इंडस्ट्रियल ग्रोथ को, एनर्जी सेक्टर को, हेल्थ केयर सेंटर को बहुत लाभ हुआ है। खेती किसानी से लेकर आधुनिक इनोवेटर्स को भी भारत के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम ने बहुत मदद की है। साथियो, कुछ ही दिन पहले, हमारे न्यूक्लियर साइंटिस्ट ने एक और बड़ी उपलब्धि से भारत का गौरव बढ़ाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है। दरअसल, क्रिटिकलिटी वह स्टेज है, जिसमें रिएक्टर पहली बार सेल्फ सस्टेनिंग न्यूक्लियर चैन रिएक्शन में सफलता हासिल करता है। इस स्टेज का मतलब है रिएक्टर का ऑपरेशन फेज में पहुंचना। भारत की न्यूक्लियर एनर्जी जर्नी में यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। और बड़ी बात ये भी कि परमाणु रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।
भारत में वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की और ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा,’ पवन-शक्ति’ भारत के विकास की नई कहानी लिख रही है। भारत ने हाल ही में पवन-ऊर्जा यानि विंड एनर्जी में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत का विंड एनर्जी जेनरेशन कैपेसिटी 56 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। पिछले एक साल में ही करीब 6 गीगावॉट नई क्षमता जुड़ी है। विंड एनर्जी में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया भी हमारी तरफ देख रही है। साथियो, आज भारत, विंड एनर्जी कैपेसिटी में दुनिया में चौथे स्थान पर है। यह हमारे इंजीनियरों की मेहनत है, यह हमारे युवाओं का परिश्रम है, यह देशी की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा, भगवान गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने हमें सिखाया है कि शांति हमारे भीतर से शुरू होती है, उन्होंने बताया है कि स्वयं पर विजय सबसे बड़ी विजय होती है। आज दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अहम हो गए हैं। श्री मोदी ने बताया कि, दक्षिण अमेरिका के चिली में एक संस्था भगवान बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ा रही है। लद्दाख में जन्मे ड्रबपोन ओत्जर रिनपोचे के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। ये संस्था ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रही है। कोचीगुआज घाटी में बना स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है। वाकई, यह देखकर गर्व होता है। भारत की प्राचीन धारा दुनिया तक पहुँच रही है। दूर-दराज के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे देश में अब 23 जनवरी, यानि, नेताजी सुभाष की जयंती से लेकर 30 जनवरी, यानि, गांधी जी की पुण्यतिथि तक गणतंत्र का महोत्सव मनाया जाता है। इसी महोत्सव का अहम हिस्सा होता है – बीटिंग रिट्रीट। बीटिंग रिट्रीट की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, आपने देखा होगा, यह समारोह अलग-अलग बैंड्स की विविध संगीत परंपराओं को दर्शाता है। बीते कुछ सालों से इसमें भारतीय संगीत का समावेश बढ़ा है और ये देश के लोगों को भी बहुत पसंद आ रहा है। इस साल की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी भी बहुत यादगार रही थी। एयर फोर्स आर्मी नेवी और सीएपीएफ बैण्ड ने बहुत ही अच्छी परफॉर्मेंस दी थी।
प्रधानमंत्री ने कच्छ के रण का जिक्र करते हुए कहा,बरसात खत्म होते ही यहां की धरती जीवंत हो जाती है। हर साल लाखों फ्लेमिंगो पक्षी यहां आते हैं। पूरा इलाका गुलाबी रंग से रंग जाता है, इसलिए इसे ‘फ्लेमिंगो सिटी ’ कहा जाता है। ये पक्षी यहीं घोसलें बनाते हैं और अपने बच्चों को बड़ा करते हैं। कच्छ के लोग इन्हें ‘लाखा जी के बाराती’ कहते हैं। अब लाखा जी के ये बाराती कच्छ में पर्यावरण संरक्षण के बड़े सुंदर प्रतीक बन गए हैं। दूसरा किस्सा इंसान और वन्य-जीवों के सहयोग का है। और ये उत्तर प्रदेश से है। यहां के तराई इलाकों में फसल के समय हाथियों के झुंड गाँव की ओर आते हैं। इससे टकराव की आशंका बढ़ती है। लेकिन, अब यू.पी. में भी ‘गज मित्र’ जैसे प्रयास शुरू हुए हैं। गाँव के लोग ही टीम बनाकर हाथियों पर नजर रखते हैं। वे समय रहते लोगों को सतर्क करते हैं। इससे टकराव कम हो रहा है और लोगों में भरोसा बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में ब्लैक बक, यानि, काले हिरण फिर से दिखाई देने लगे हैं। एक समय इनकी संख्या बहुत कम हो गई थी, लेकिन लगातार प्रयास हुए, और संरक्षण बढ़ाया गया। आज ये फिर से खुले मैदानों में दौड़ते नजर आते हैं। यह हमारी खोती विरासत की वापसी है। ऐसी ही उम्मीद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानि गोडावण के संरक्षण में भी दिख रही है। ये पक्षी हमारे रेगिस्तानी इलाकों की पहचान हुआ करती थी। लेकिन, एक समय इसकी संख्या बहुत कम रह गई थी। हालत ये थी कि ये पक्षी लुप्त होने की कगार पर पहुँच गई थी। लेकिन अब इसके संरक्षण के लिए बड़ा अभियान चल रहा है। वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा रहे हैं। प्रजनन केंद्र बनाए गए हैं और अब नए जीवन की शुरुआत दिखाई दे रही है।
बंबू (बांस) सेक्टर में नॉर्थ ईस्ट की सफलता का जिक्र करते हुएश्री मोदी ने कहा, जिस चीज को कभी बोझ के रूप में देखा जाता था, वह आज रोजगार, कारोबार और इनोवेशन को नई गति दे रही है। हमारी माताएं-बहनें इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बंबू की परिभाषा बदल देने से कितना बड़ा परिवर्तन आया है। साथियो, अंग्रेजों के बनाए कानून के हिसाब से बंबू को पेड़ के रूप में परिभाषित किया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत कड़े थे। कहीं पर भी बंबू को ले जाना बहुत मुश्किल था। ऐसे में यहां के लोग बांस से जुड़े काम-धंधे से दूर होते गए। साथियो, साल 2017 में कानून में बदलाव करके हमने बंबू को पेड़ की कैटिगरी से बाहर किया। जिसके नतीजे सबके सामने हैं। आज पूरे नॉर्थ ईस्ट में बंबू सेक्टर फल-फूल रहा है। लोग लगातार इनोवेशन करके इसमें वैल्यू एडिशन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, आपके पास गणित के बहुत ही कठिन सवाल हैं। इन्हें सुलझाने के लिए समय है – केवल साढ़े चार घंटे। यानि वक्त बहुत कम है और कंपटीशन इंटरनेशनल है, बहुत तगड़ा है। ऐसी स्थिति में नर्वस होना बहुत स्वाभाविक है। लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमारी बेटियों ने कमाल कर दिया। इस महीने की शुरुआत में फ़्रांस के बोरदो में यूरोपियन गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड का आयोजन हुआ था। मैथ्स में गहरी रुचि रखने वाली स्कूली छात्राओं के लिए ये एक बड़ी प्रतियोगिता थी। यह दुनिया की सबसे सम्मानित प्रतियोगिताओं में से एक है। इस ओलंपियाड में हमारी बेटियों ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुझे इस प्रतिभाशाली टीम पर बहुत गर्व है। इसमें मुंबई की श्रेया मुंधड़ा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रिमोयी बेरा शामिल थीं। इसमें हमारी टीम विश्व में छठे स्थान पर रही। श्रेया ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया, संजना ने सिल्वर, तो शिवानी ने ब्रोंज मेडल अपने नाम किया। इस ओलंपियाड के लिए भारत में जो selection की प्रक्रिया है, वो अपने आप में बहुत कठिन है। इसका एक मल्टी स्टैंजेज सिलेक्शन प्रोसेस लेबल पर कठिन चुनौतियों को पार करना होता है। इसके बाद सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राएँ एक महीने के मैथमेटिक्स ट्रेनिंग कैंप में शामिल होती हैं। यह कैंप टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च के होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन ल में आयोजित होता है। इस कैंप के आखिर में के टीम सिलेक्शन टेस्ट होता है। इसमें परफॉर्मेंस के आधार पर ही भारत की टीम चुनी जाती है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि, हमारे देश में इस समय एक बहुत अहम् अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी जरूरी है। ये है जनगणना का अभियान, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है। साथियो, जो साथी पहले से इस तरह की प्रक्रिया से गुजरे हैं, इस बार जनगणना का उनका अनुभव, अलग होने वाला है। जनगणना 2027 को डिजिटल बनाया गया है। सारी जानकारी सीधे डिजिटल माध्यम में दर्ज हो रही है। घर-घर जाने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल एप है। वे आपसे बात करके उसी में जानकारी दर्ज करेंगे। साथियो, इस बार जनगणना में आपकी भागीदारी भी आसान बनाई गई है, आप खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले आपके लिए सुविधा शुरू होगी। आप अपने समय के अनुसार जानकारी भर सकते हैं। जब आप प्रक्रिया पूरी करते हैं, तो आपको एक विशेष आईडी मिलती है। ये आईडी आपके मोबाइल या ईमेल पर आती है। बाद में जब कर्मचारी आपके घर आता है, तो आप यही आईडी दिखाकर जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ती। समय भी बचता है और प्रक्रिया आसान हो जाती है। साथियो, जिन राज्यों में स्व-गणना का काम पूरा हो गया है, वहां, गणना कर्मचारी द्वारा घरों के सूचीकरण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण का कार्य पूरा भी हो चुका है। साथियो, देश की जनगणना सिर्फ सरकारी काम नहीं है। यह हम सब की जिम्मेदारी है। आपकी भागीदारी बहुत जरूरी है। आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है, यह गोपनीय रखी जाती है, डिजिटल सुरक्षा के साथ इसे सुरक्षित किया जाता है। आइए, हम सब मिलकर इस प्रक्रिया में भाग लें। जनगणना 2027 को सफल बनाएं।
श्री मोदी ने बताया कि, शहमारे देश में खाने-पीने की परंपरा सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रही है। इसी परंपरा का एक दिलचस्प हिस्सा है भारत की चीज पनीर कुछ दिन पहले मैंने ट्विट के माध्यम से एक जानकारी साझा की थी। ब्राजील में आयोजित एक अन्तर्राष्ट्रीय चीज श प्रतियोगिता में भारतीय चीज के दो ब्रांड श को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। इस उपलब्धि की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हुई। कई लोगों ने मुझसे कहा कि भारत में चीजेज् की जो विविधता है। उस पर भी प्रधानमंत्री ने विचार साझा किया।
कुछ ही दिन बाद 9 मई को ‘पोच्चीशे बोइशाख’ के अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर की जन्म-जयंती मनाएंगे। गुरुदेव बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक महान लेखक और विचारक तो थे ही, उन्होंने कई प्रसिद्ध संस्थानों को भी आकार दिया। गुरुदेव टैगोर लोगों के लिए ऐसे उद्योगों के पक्षधर थे, जिनमें स्थायी रोजगार मिलने के साथ ही गांवों का भी कल्याण हो। उनके रवींद्र संगीत का प्रभाव आज भी दुनिया-भर में बना हुआ है। मेरे लिए शांति निकेतन की यात्राएं अविस्मरणीय रहीं। यह वही इंस्टीट्यूशंस है, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण भाव से सींचा और संवारा था। उन्हें एक बार फिर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।
मन की बात के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि, मई का महीना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की याद भी दिलाता है। मैं मां भारती की सभी वीर संतानों को नमन करता हूं, जिन्होंने लोगों में देश-भक्ति की भावना जागृत की थी। यह समय स्कूली बच्चों की छुट्टियों का भी होता है। मेरा आग्रह है कि वे अपनी छुट्टियों का भरपूर आनंद लें और कुछ नया सीखने का प्रयास करें। गर्मियों के इस मौसम में आप सभी अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखें। अगले महीने आपसे फिर मुलाकात होगी। कुछ नए विषयों के साथ, देशवासियों की कुछ नई उपलब्धियों के साथ। बहुत-बहुत धन्यवाद ।
