अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर किए हवाई हमले: ईरान ने विनाशकारी जवाबी कार्रवाई का किया ऐलान,
Delhi 08 July 2026,
तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खोमेनी के अंतिम संस्कार के धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। देश-विदेश से लाखों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं। इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर दिए। अमेरिका ने कहा है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए की गई है। वहीं अमेरिका की इस कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान की ‘इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स’ (आईआरजीसी) ने विनाशकारी जवाबी कार्रवाई का एलान किया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि,हॉर्मोस स्ट्रेट में ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर लगातार हमले किए जाने के जवाब में ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए की गई है। यूएस सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा और विनाशकारी सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के तहत अमेरिकी बलों ने ईरान के 80 अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इस अचानक हुए बड़े हमले से न केवल ईरान बल्कि पूरे वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है, यह हमला आक्रामकता नहीं है। बल्कि ईरान की उकसावे वाली कार्रवाई का सीधा और कड़ा जवाब है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में कमर्शियल (व्यावसायिक) जहाजों और तेल टैंकरों को जानबूझकर अपना निशाना बनाया था। अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। अमेरिका ने कड़े शब्दों में कहा है कि ईरान ने ,हॉर्मोस स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमलों के जरिए पिछले महीने ही हुए द्विपक्षीय युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है।
अमेरिका की इस कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान की ‘इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स’ ने विनाशकारी जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया। ईरानी सेना का दावा है कि उन्होंने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इस ऑपरेशन के तहत 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिनमें बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट से जुड़े ठिकाने और कुवैत का अली अल सलेम एयरबेस शामिल हैं। आईआरजीसी ने एक अमेरिकी एमक्यू रीपर ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया है। हालांकि अमेरिका ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव से वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। जिसका सीधा असर भारत समेत कई विकासशील देशों में पेट्रोल, डीजल, गैस की कीमतों और रोजमर्रा की महंगाई के रूप में दिखने लगा है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
