दो दिवसीय ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक संपन्न:ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर रहा अलग-अलग दृष्टिकोण,
Delhi 16 May 2026,
भारत की अध्यक्षता में 14-15 मई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक सफलता पूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने की। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से वैश्विक स्तर पर कई देश ऊर्जा, खाद्य, स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इन संकटों के समाधान पर भारत ने जोर दिया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की बात कही और स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस एक सार्वभौमिक नियम होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि वैश्विक व्यवस्था को समावेशी बनाने के लिए इसमें जल्द बदलाव जरूरी हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय सहायता और तकनीक तक न्यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की। 14 मई को ब्रिक्स देशों और उनके सहयोगी देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ और ‘पीपल-सेंट्रिक’ विजन पर जोर दिया। उन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के हितों की रक्षा करने और वैश्विक मंच पर उनकी आवाज को और मजबूत करने के लिए ब्रिक्स के महत्व को रेखांकित किया। विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची सहित कई बड़े नेता भारत पहुंचे हैं। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से वैश्विक कूटनीति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। वहीं, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल और गैस बाजारों की अनिश्चितता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न सत्रों में गहन संवाद हुआ। बैठक के दूसरे दिन ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों ने बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर विचार साझा किए और अनाज व्यापार मंच जैसी पहलों की सराहना की। जारी रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण थे। इस भू-राजनीतिक तनाव और गहरे मतभेदों के कारण यह दो दिवसीय बैठक बिना किसी सर्वसम्मत संयुक्त बयान के समाप्त हुई। फिलिस्तीन पर भी बैठक में सहमति बनी है। हालांकि, सर्वसम्मत अंतिम घोषणापत्र नहीं आ सका, लेकिन सदस्य देश पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक ‘स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र’ के विचार पर सहमत दिखे हैं।
