April 20, 2026

महिला आरक्षण बिल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन,

Delhi 19 April 2026,

महिला आरक्षण बिल के संसद में गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र राष्ट्र के नाम संदेश दिया। देश वासियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने महिलाओं से माफी मांगी और कांग्रेस और विपक्ष को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी के इस संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि पीएम का भाषण वास्तविकता से दूर है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीएम ने सरकारी मंच का उपयोग राजनीतिक भाषण देने के लिए किया और विपक्ष पर निराधार आरोप लगाए। कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण पर उनका रुख हमेशा स्पष्ट रहा है, और उन्होंने 2010 में राज्यसभा में इस बिल को पास कराया था, साथ ही 2023 के कानून का भी समर्थन किया। कांग्रेस ने मांग की है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। इसके साथ ही परिसीमन और महिला आरक्षण को अलग रखने की बात भी की गई। पार्टी ने सरकार पर महिलाओं के मुद्दों पर विफल रहने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।

शनिवार को नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, “कल जो हुआ, वह लोकतंत्र की एक बहुत बड़ी जीत थी। संघीय ढांचे को बदलने और लोकतंत्र को कमजोर करने की सरकार की साजिश नाकाम हो गई और रुक गई। यह संविधान की, देश की और विपक्ष की एकता की जीत थी। यह बात सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।”

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पास न होने के बाद रविवार को कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता अलका लांबा भी विरोध स्थल पर मौजूद थीं।

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी का रवैया महिला-विरोधी इरादों को दिखाता है और इस मुद्दे पर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद हुड्डा ने कहा कि जिस तरह से भाजपा ने महिलाओं को बेवकूफ बनाने की कोशिश की है, उससे उनके महिला-विरोधी इरादे साफ ज़ाहिर होते हैं। उनका असली मकसद महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन थोपना था।

कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने पीएम मोदी से एक सवाल पूछते हुए कहा कि महिला आरक्षण का फायदा उठाकर और परिसीमन को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करके देश की अखंडता पर हमला क्यों किया जा रहा है?

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पीएम मोदी के राष्ट्र संबोधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि पीएम अपने पद के रूप में बोल रहे थे या भाजपा के नेता के तौर पर। सिब्बल ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के सामने खड़े होकर इस तरह का भाषण देना भारतीय राजनीति का नया निम्न स्तर है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में चुनाव आयोग या अन्य संस्थाएं कोई कार्रवाई नहीं करेंगी।

राष्ट्र के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक के संसद में गिरने के लिए, कांग्रेस और विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। संदेश में पीएम मोदी ने कहा, कुछ लोग इसे सरकार की नाकामी बता रहे हैं, लेकिन यह मुद्दा नहीं है। उन्होंने संसद में कहा था कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो वह विज्ञापन छपवाकर विपक्ष को इसका श्रेय दे देंगे। लेकिन दकियानूसी विचार वाले अपनी बातों पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि आज आप सब दुखी हैं, और मैं भी आपके इस दुख में दुखी हूं। भले ही बिल पास कराने के लिए आवश्यक 66 प्रतिशत वोट हमें नहीं मिले, लेकिन मुझे विश्वास है कि देश की 100 प्रतिशत नारी शक्ति का आशीर्वाद हमारे पास है।

 

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