काफलीगैर में खुलेगा नया राजकीय महाविद्यालय, 18 पदों को मिली मंजूरी; युवाओं को घर के पास मिलेगी उच्च शिक्षा
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग ने बागेश्वर जनपद के काफलीगैर में नए राजकीय महाविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी है। शासन स्तर से महाविद्यालय की स्थापना का शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही महाविद्यालय के संचालन के लिए शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर संवर्ग के कुल 18 पदों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार ने प्रत्येक विकासखंड में एक-एक महाविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है, ताकि छात्र-छात्राओं को अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो सके।
डॉ. रावत ने बताया कि राजकीय महाविद्यालय काफलीगैर के लिए स्वीकृत 18 पदों में प्राचार्य, असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति शास्त्र और संस्कृत तथा पुस्तकालयाध्यक्ष, वरिष्ठ सहायक, पुस्तकालय लिपिक और बुक लिफ्टर के एक-एक पद शामिल हैं।
इसके अलावा कनिष्ठ सहायक, अनुसेवक और स्वच्छक कम चौकीदार के दो-दो पद स्वीकृत किए गए हैं। स्वीकृत पदों में 13 नियमित और 5 आउटसोर्स पद शामिल हैं। आउटसोर्स के अंतर्गत बुक लिफ्टर, अनुसेवक और स्वच्छक/चौकीदार के पद रखे गए हैं।
मंत्री ने कहा कि सृजित पदों के सापेक्ष विभागीय स्तर से नियमानुसार नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी। महाविद्यालय का संचालन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मानकों के अनुरूप किया जाएगा।
डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि महाविद्यालय में प्रोफेशनल और रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए UGC और AICTE से विधिवत मान्यता प्राप्त करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि काफलीगैर क्षेत्र में महाविद्यालय खोलने की मांग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से की जा रही थी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नए महाविद्यालय के खुलने से क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। सरकार जल्द ही महाविद्यालय के लिए भूमि और भवन की व्यवस्था करेगी।
उन्होंने कहा कि नवीन महाविद्यालय भवन में छात्र-छात्राओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।